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और लेख

  • ओड़िशा से संचालित संगठन शांता मेमोरियल रिहैबिलिएशन सेंटर यूएसएड से मिले फंड की मदद से विक्लांग महिलाओं को क्षमता विकास प्रशिक्षण के माध्यम से सशक्त बना रहा है।

     

  • फुलब्राइट स्कॉलर तृप्ति जैन के सामाजिक उद्यम द्वारा विकसित भुंगरू सिंचाई प्रणाली एक ऐसा अभिनव प्रयोग है जो जलवायु में बदलाव का दंश झेल रहे किसानों को समृद्धि का मौका उपलब्ध करा रहा है।

     

  • फ़ुलब्राइट-नेहरू डॉक्टरल फ़ेलो और नेक्सस इनक्यूबेटर प्रशिक्षित आईएमपीआरआई की सीईओ सिमी मेहता अपने वैचारिक संस्थान और नई दिल्ली में बेघरों के आश्रय स्थलों के प्रबंधन के बारे में बता रही हैं।

     

  • एयरस्वी में भागीदारी करने वाली क्षमा हस्तक सार्थक फ़ाउंडेशन के ज़रिये समाज के आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्गों के बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा प्रदान कर रही हैं।

     

  • फ़ुलब्राइट फ़ेलो गीता सूरी इस बात पर शोध कर रही हैं कि नवीकरणीय ऊर्जा को किस तरह से सामाजिक उद्यमिता के जरिये ग्रामीण भारत तक लेकर जाया जाए।

     

  • इंटरनेशनल विजिटर लीडरशिप प्रोग्राम के प्रतिभागी मैथ्यू जोस का बहुआयामी कचरा प्रबंधन उद्यम पेपरमैन भारत को बेहतर सदाजीविता की तरफ ले जा रहा है।

     

  • लेखिका और प्रो़फेसर जिगना देसाई दक्षिण एशियाई समुदाय में कुछ पुरातनपंथी कायदों की नए संदर्भों में पड़ताल कर रही हैं।

     

  • अपने उद्यम डिफेंडेबल्स के उत्पादों के जरिये महिला उद्यमी क्रिस्टी गोरिनैस महिलाओं की आत्मरक्षा के काम में मदद कर रही हैं।

     

  • पत्रकारिता के क्षेत्र ने ज़्यादा से ज़्यादा महिलाओं को मौका देने के लिए तरह-तरह के प्रयोग किए हैं, लेकिन अब भी इसमें महिलाओं की भागीदारी कम है और उन्हें अक्सर भेदभाव का शिकार बनना पड़ता है।

     

  • शालिनी शंकर का प्रयास है कि पीढि़यों की जनसांख्यिकी परिभाषा में आप्रवासियों और अल्पसंख्यकों के नज़रिये को भी समावेशित किया जाए।

  • कैलि़फोर्निया की नॉन प्रॉफिट संस्था ‘युवा’ झारखंड में लड़कियों के समूह खेल का इस्तेमाल सामाजिक विकास के लिए कर रही है।

  • पूजा नागपाल ताइक्वोंडो के ज़रिये लड़कियों को सशक्त बनने के गुर बताती हैं। पाठ्यक्रम में न सिर्फ शारीरिक क्षमता पर जोर दिया गया है बल्कि मानसिक बल में वृद्धि को भी विशेष महत्व दिया गया है। 

  • एक भारतीय विचार समूह ‘विमिन इन सिक्युरिटी, कऩिफ्लक्ट मैनेजमेंट एंड पीस’ सुरक्षा और टकराव के मामलों से जुड़ी चर्चा और निर्णय प्रक्रिया में महिलाओं को केंद्रीय भूमिका में रखता है।

  • बेल बजाओ! अभियान के तहत लड़कों और पुरुषों से महिलाओं के खिलाफ घरेलू हिंसा से निपटने में सक्रिय होने का आग्रह किया जाता है।