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वासु कुलकर्णी: खेल की दुनिया में तकनीक

कुलकर्णी की कंपनी के पास  अभी 350 टीमें ग्राहक के तौर पर हैं और सैकड़ों अन्य कंपनियां क्रॉसओवर के ग्राहक बनने के लिए कतार में हैं। 


वासु कुलकर्णी 4 साल की उम्र में ही बास्केटबॉल के दीवाने हो गए थे। उस समय वह लॉस एंजिलिस में रहते थे और उन्होंने पहली बार एनबीए का फाइनल देखा था। वर्ष 1994 के भूकंप के बाद जल्दी ही वासु का परिवार उन्हें अपने देश की संस्कृति से परिचित कराने के लिए भारत आ गया। बेंगलुरु में रहने में पहले उन्हें मुश्किलें आईं क्योंकि उनको ''अजीब लहजे में बोलने वाल बच्चे  के तौर पर जाना जाता। पर जल्दी ही उन्होंने माहौल से तालमेल बैठा लिया। उन्होंने अपने स्कूल के कोर्ट में ही बास्केटबॉल खेलना शुरू किया जहां कोर्ट का फर्श गंदा होता था और बैकबोर्ड लकड़ी का था। ''1995 में भारत में हरेक के दिमाग में क्रिकेट का जुनून था और बास्केटबॉल खेलना आसान नहीं था।" उन्होंने क्लब टीमों में खेल कर बास्केटबॉल के प्रति अपनी दीवानगी को बनाए रखा। हाईस्कूल पास करने के बाद वह फिलाडेल्फिया की पेंसिल्वेनिया यूनिवर्सिटी में पढऩे गए जहां उन्होंने बास्केटबॉल टीम में अपनी जगह बनाने की कोशिश की। 
 
5 फुट 10 इंच लंबे और 61 किलो वज़न के वासु को जल्द ही महसूस हुआ कि ''उनमें और दूसरे खिलाडिय़ों में काफी अंतर है। मैं हमेशा सोचता और हैरान होता था कि क्या मुझमें बास्केटबॉल खेलने कीपर्याप्त खूबियां हैं क्योंकि भारतीय बहुत ज्यादा लंबे नहीं होते।" वासु यूनिवॢसटी में सीनियर ईयर में जाने तक लगातार बास्केटबॉल खेलने की प्रैक्टिस करने लगे। हालांकि उस समय तक उन्हें एथलेटिक्स स्कॉलरशिप भी नहीं मिलती थी। आखिर वह यूनिवॢसटी की जूनियर टीम में जगह बनाने में कामयाब हो गए। 
टीम की ओर से खेलने के दौरान उनके कोच ने उन्हें बढिय़ा सलाह दी। ''तुम बास्केटबॉल के आंकड़ों पर निगाह क्यों नहीं  डालते।" हर गेम के दौरान एकत्र आंकड़ों को देखने के बाद उन्हें विश्वास था कि तकनीक की मदद से इस जानकारी को बेहतर तरीके से एकत्र किया जा सकता है और उसका विश्लेषण हो सकता है जिससे कि खिलाडिय़ों को लाभ हो। बास्केटबॉल के आंकड़ों से जुड़े सस्ते सॉ$फ्टवेयर के लिए उन्हें भरोसेमंद और कम लागत वाले कंप्यूटर प्रोग्रामरों की ज़रूरत थी। कंप्यूटर, दूरसंचार और उद्यमिता में डिग्री लेने के बाद उन्होंने भारत में अपने संपर्कों से नाता जोडऩा शुरू किया। कुलकर्णी तब तक दिन के समय कंसल्टेंट का काम करते रहे जब तक उनके  हायर किए हुए प्रोग्रामर प्रोटोटाइप सॉफ्टवेयर पैकेज बनाने के काबिल नहीं हो गए। प्रोटोटाइप और अपने दोस्त की मदद से 50 हज़ार डॉलर का निवेश हासिल करने के बाद कुलकर्णी ने नवंबर 2008 में क्रॉसओवर इंटेलिजेंस नामक कंपनी शुरू की। 
 
न्यू यॉर्क सिटी में स्थित इस कंपनी ने ऑनलाइन वीडियो सर्च इंडस्ट्री पर फोकस किया। सॉफ्टवेयर की मदद से गेम के आंकड़ों को वीडियो फुटेज से मिलाकर एक डेटाबेस तैयार किया गया। इस डेटाबेस की मदद से कोच और खिलाड़ी खेल की समीक्षा और विश्लेषण कर सकते हैं। कुलकर्णी क्रॉसओवर को स्पोर्ट्स वीडियो कंटेंट का ऑनलाइन डेटाबेस कहते हैं जिसकी मदद से आंकड़ों का विश्लेषण कर कोच और एथलीट अपने खेल के स्तर में सुधार कर सकते थे। इसके जरिए खिलाडिय़ों के शानदार खेल की यादों को भी सहेजा जा सकता था- 90 फीसदी एथलीट के लिए हाईस्कूल और कॉलेज के दिनों में उनका प्रदर्शन सर्वश्रेष्ठï होता है- और यह उस उच्च स्तर तक होता है जहां तक वे कभी भी पहुंचते हैं।" पहले कुलकर्णी इस बात को लेकर नर्वस थे कि स्पोर्ट्स की दुनिया में एक भारतीय को किस तरह से स्वीकार किया जाएगा। उस समय उन्होंने किसी और व्यक्ति को कंपनी का चेहरा बनाने पर विचार किया। पर उन्हें अहसास हुआ कि बास्केटबॉल के प्रति उनकी दीवानगी हमेशा रहेगी और अपने उत्पाद और गेम के प्रति उनके संदेह दूर हो गए। उन्हें यह भी लगा था कि महज 22 साल की उम्र में निवेशकों का विश्वास जीतने में कुछ दिक्कत हो सकती है लेकिन यह कोई मुद्दा नहीं था क्योंकि लोग तकनीकी क्षेत्र में युवाओं को ड्राइविंग सीट पर देखने के आदी हैं। 
 
भारत और अमेरिका, दोनों जगह पर रहने से कुलकर्णी को अपनी कंपनी शुरू करने में मदद मिली। कुलकर्णी कहते हैं, ''जब मैं अमेरिका से भारत आया तो यहां मुझे हर चीज़ अमेरिका से अलग दिखाई दी, जिससे मुझे यह समझ में आ गया कि आपको हमेशा वह नहीं मिल सकता जो आप चाहते हैं।" जीवन में अनुभव होने के साथ ही उन्हें भारत में महत्वपूर्ण लोगों से संपर्क साधने का मौका भी मिला। अब उनका भारत में भी ऑफिस हैं और वह स्वीकार करते हैं कि अगर वह यहां नहीं रहते तो उन्हें नहीं मालूम कि वह क्रॉसओवर कंपनी शुरू कर भी पाते या नहीं। 
 
क्रॉसओवर कंपनी अब अपने ग्राहकों को बास्केटबॉल और लेक्रोसी दोनों प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराती है। ''इस साल के अंत तक फुटबॉल को भी शामिल कर लिया जाएगा और अगले साल इसमें सॉकर, वॉलीबॉल और टेनिस को भी शामिल कर लिया जाएगा। हमारे पास अभी 350 टीमें ग्राहक के तौर पर हैं और सैकड़ों अन्य कंपनियां क्रॉसओवर के ग्राहक बनने के लिए कतार में हैं। हम इस सीज़न में 500 बास्केटबॉल की टीमों को अपनी सेवाएं प्रदान करेंगे। बाकी सभी कंपनियां प्रतीक्षा सूची में होंगी। अगले बास्केटबॉल सीज़न में इसका विस्तार कर 1000 से 1500 टीमों को संभवत: अपनी सेवा देंगे।" कुलकर्णी का सपना है कि किसी एनबीए टीम में बहुमत शेयर वाले वह पहले भारतीय हों। कंपनी इसी दिशा में आगे बढ़ती जा रही है क्योंकि पिछले साल की तुलना में कंपनी की आय में 500 फीसदी की बढ़ोतरी हुई और अगले साल कंपनी का लक्ष्य इतनी ही और बढ़ोतरी का है। 
 
उभरते हुए उद्यमियों को कुलकर्णी की सलाह है, ''याद रखिए कि जो शॉट आप नहीं लगाते, उन्हें आप शतप्रतिशत चूक जाते हैं।"
 
 

कैटलिन मैक्वी सिएटल, वाशिंगटन में रहकर लेखन कार्य कर रही हैं।