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महिला उद्यमियों के लिए सशक्त पहल

  • असम में डिफेंस एंड स्पेस रोबोटिक्स लैबोरेटरी में कार्यरत पंखी कश्यप। यह कंपनी रोबोटिक्स और ऑटोमेशन के क्षेत्र में काम करती है। फोटोग्राफ साभार: पंखी कश्यप
  • नगालैंड से संचालित कंपनी पेन्थ्रिल पब्लिकेशन हाउस की संस्थापक और मालिक विशु रीता क्रोचा का। उनकी कंपनी स्थानीय लेखकों की किताबें प्रकाशित करती हैं। फोटोग्राफ साभार: विशु रीता क्रोचा
  • डेदीप चेतिया असम से अपनी संस्था लेट्स लर्न टुगेदर का संचालन करती हैं। उनका उद्देश्य उन विद्यार्थियों को गुणवत्तापरक शिक्षा मुहैया कराना है जिनकी पढ़ाई में भाषा बाधा बनती है, खासकर जो अर्द्धशहरी या ग्रामीण क्षेत्रों में रहते हैं। फोटोग्राफ साभार: डेदीप चेतिया
  • मणिपुर की एक इत्र बनाने वाली छोटी कंपनी अक्टूबर पंपकिन कंपनी की मालिक रिचोन काशुंग। फोटोग्राफ साभार: रिचोन काशुंग
  • एशियन कॉऩ्फ्लुएंस के सीनियर फेलो और भारत में एडब्ल्यूई प्रोग्राम के मुख्य समन्वयक पृथ्वीराज नाथ। फोटोग्राफ साभार: पृथ्वीराज नाथ

अमेरिकी विदेश विभाग के प्रोग्राम के तहत पूर्वोत्तर भारत की महिला उद्यमियों को अपने उपक्रमों को बढ़ाने, पूंजी जुटाने और साथी कारोबारियों से नेटवर्किंग करने के लिए प्रशिक्षित किया गया।


‘‘एकेडेमी फ़ॉर वुमेन एंट्रेप्रेन्यॉर (एडब्ल्यूई) प्रोग्राम ने मेरी कारोबारी दुनिया की सारी खाइयां पाट दी हैं।’’ यह कहना है नगालैंड से संचालित कंपनी पेन्थ्रिल पब्लिकेशन हाउस की संस्थापक और मालिक विशु रीता क्रोचा का। उनकी कंपनी स्थानीय लेखकों की किताबें प्रकाशित करती हैं। वह कहती हैं, ‘‘हमेशा चीज़ें इतनी आसान नहीं थीं- ऐसा समय भी था जब मेरे पास अगली किताब को प्रकाशित करने के लायक पैसे नहीं थे। लेकिन इन सभी चुनौतियों के बावजूद मैं इस उपक्रम को किसी और चीज़ से बदलना नहीं चाहूंगीं।’’

क्रोचा उन 150 उद्यमियों में शामिल हैं जिन्होंने एडब्ल्यूई प्रोग्राम के लिए पंजीकरण कराया है। यह प्रोग्राम 50 से ज़्यादा देशों में संचालित किया जा रहा है और महिला उद्यमियों और शुरुआती चरण के कारोबारियों को वे चीज़ें मुहैया कराता है जिससे वे अपने कारोबार को बढ़ा सकें, पूंजी जुटा सकें और अन्य सफल कारोबारियों के साथ नेटवर्क बना सकें।

अमेरिकी विदेश विभाग के शैक्षिक एवं सांस्कृतिक मामलों के ब्यूरो द्वारा वित्तपोषित भारतीय एडब्ल्यूई प्रोग्राम को अमेरिकी कांसुलेट कोलकाता और मेघालय के चिंतन समूह एशियन कॉऩ्फ्लुएंस की सहभागिता में चलाया जा रहा है। 13 सप्ताह के ऑनलाइन व्यावसायिक प्रोग्राम ड्रीमबिल्डर के ज़रिये एडब्ल्यूई महिला उद्यमियों को अपने सपनों को हकीकत में बदलने का प्रशिक्षण देता है। इस पाठ्यक्रम में प्लानिंग, मार्केटिंग, कीमत तय करना, प्रबंधन, अकाउंटिंग, जोखिम प्रबंधन, फंडिंग, लक्ष्य बनाना, आदि को समावेशित किया जाता है।

डेदीप चेतिया असम से अपनी संस्था लेट्स लर्न टुगेदर का संचालन करती हैं। उनका उद्देश्य उन विद्यार्थियों को गुणवत्तापरक शिक्षा मुहैया कराना है जिनकी पढ़ाई में भाषा बाधा बनती है, खासकर जो अर्द्धशहरी या ग्रामीण क्षेत्रों में रहते हैं। वह कहत हैं, ‘‘मैंने विस्तृत कारोबारी योजना को लिखना सीखा- इसमें क्या शामिल होना चाहिए, कौनसे कारक कारोबार को प्रभावित कर सकते हैं, प्रतिस्पर्धियों के बारे में कैसे जानें, मार्केट सर्वे कैसे करें और कारोबार को कैसे बढ़ाएं।’’

एडब्ल्यूई प्रोग्राम के अन्य प्रतिभागियों की तरह चेतिया की संस्था भी उनके द्वारा झेली गई मुश्किलों से प्रेरणा लेकर बनी।

चेतिया कहती हैं, ‘‘वर्नाक्युलर मीडियम स्कूल की विद्यार्थी होने और ग्रामीण क्षेत्र में रहने के नाते, जहां कोचिंग सुविधा उपलब्ध नहीं है, मुझे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने में बहुत-सी मुश्किलें आईं, क्योंकि पाठ्य सामग्री अंग्रेजी और हिंदी में उपलब्ध होती हैं, क्षेत्रीय भाषाओं में नहीं। बाद में, मैंने महसूस किया कि मेरे जैसे बहुत-से लोग हैं। इसने मुझे ऐसा प्लेटफ़ॉर्म प्रारंभ करने को प्रोत्साहित किया, जो  भौगोलिक सीमाओं और भाषा के बंधनों से परे जाकर विद्यार्थियों की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने में मदद करे।’’

एडब्ल्यूई नगालैंड, मेघालय, मणिपुर, मेघालय, असम, मणिपुर और अरूणाचल प्रदेश में सक्रिय है और महिला उद्यमियों की कई तरह के कारोबार में मदद करती है।

एशियन कॉऩ्फ्लुएंस के सीनियर फेलो और भारत में एडब्ल्यूई प्रोग्राम के मुख्य समन्वयक पृथ्वीराज नाथ कहते हैं, ‘‘बहुत-से क्षेत्रों और विषयों के बिजनेस आइडिया एडब्ल्यूई प्रोग्राम का भाग हैं। इसमें अन्य के अलावा स्वास्थ्य देखभाल, मानसिक स्वास्थ्य, आतिथ्य, शिक्षा, कृषि-बागवानी, खाद्य एवं पेय पदार्थ, सौंदर्य एवं सेहत, यात्रा एवं पर्यटन, कपडे़, कचरा प्रबंधन, तकनीकी स्टार्ट-अप और हस्तकला शामिल हैं।’’

नाथ बताते हैं, प्रोग्राम में शामिल होने वाली कंपनियों में सिर्फ दो लोगों द्वारा संचालित कंपनियों से लेकर ऐसी कंपनियां भी होती हैं जो सीजन के मुताबिक सैंकड़ों लोगों को रोज़गार देती हैं।

वह कहते हैं, ‘‘एडब्ल्यूई इंडिया प्रोग्राम के लिए प्रतिभागी आइडिया प्रस्तुत करने के खुले आह्वान के बाद चुने जाते हैं। इसमें पांच राज्यों की महिला उद्यमियों को अपने अनूठे बिजनेस आइडिया और भविष्य की योजनाओं को साझा करने को कहा गया। प्रतिभागियों को विभिन्न मानकों के आधार पर अंक दिए गए। इनमें अन्य के अलावा बिजनेस आइडिया का अनूठापन, आर्थिक सशक्तिकरण के संदर्भ में आइडिया का प्रभाव, रोज़गार प्रदान करने की क्षमता और आइडिया में तकनीकी के इस्तेमाल की निर्णायक संभावना का होना शामिल है। इसके बाद प्रतिभागियों को उनके अंकों के आधार पर रैंक दी गई और 250 में से 150 का चयन कर लिया गया।’’

असम में डिफेंस एंड स्पेस रोबोटिक्स लैबोरेटरी की पंखी कश्यप कहती हैं, एडब्ल्यूई प्रोग्राम में एक कंपनी द्वारा विकसित तकनीक कोरोनावायरस महामारी पर केंद्रित है।

वह स्पष्ट करती हैं, ‘‘पहले हम युद्धक्षेत्र, बंधक बनाए जाने वाली स्थितियों या प्राकृतिक आपदा के लिए चौपाया रोबोट बना रहे थे। जब कोरोना महामारी आई तो हमने अपने अनुसंधान को शत्रु सूक्ष्मजीवों से मानव की रक्षा करने के काम पर लगाया और तीन उत्पाद तैयार किए। ये 30 सेकेंड के अंदर किसी भी सतह से कोरोनावायरस को निष्क्रिय कर देते हैं और इनका अच्छी तरह परीक्षण हो चुका है। एडब्ल्यूई प्रोग्राम ने महिलाओं के बोझ को समझते हुए अद्भुत मेंटरशिप प्रदान की और नेटवर्क तैयार करने में अच्छा साथ दिया।’’

मणिपुर की एक इत्र बनाने वाली छोटी कंपनी अक्टूबर पंपकिन कंपनी की मालिक रिचोन काशुंग कहत हैं, ‘‘यह यात्रा आंखें खोलने वाली और जीवन बदलने वाली रही है। एडब्ल्यूई और ड्रीमबिल्डर प्रोग्राम ने मुझे वे चीज़ें सिखाई हैं जो कॉलेज की पढ़ाई में नहीं सिखाई गईं। प्रोग्राम में भागीदारी के बाद, मैं जान ग कि मैं समाज को कुछ लौटाने के लिए काफी कुछ कर सकत हूं।’’

एशियन कॉऩ्फ्लुएंस की कार्यकारी निदेशक सव्यसाची दत्ता कहत हैं, ‘‘इनमें से कुछ उद्यमियों के साथ हमारा संबंध काफी लंबे समय से चला आ रहा है और उनके अपने अनुभव के आधार पर ड्रीमबिल्डर प्रोग्राम से उन्हें लाभ मिलने से बड़ी संतुष्टि मिलती है। एमएसएमई सेक्टर में जेंडर समानता पर आधारित प्रगति पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास की चाबी है।’’ एमएसएमई का अर्थ है सूक्ष्म, लघु और मध्यम दज़र्े के उपक्रम और इन्हें भारतीय अर्थव्यवस्था को गति देने वाला माना जाता है।

नाथ उल्लेख करते हैं कि एडब्ल्यूई प्रोग्राम के दौरान प्रतिभागियों के बीच बने संबंध से ऐसा नेटवर्क बनता है जो उद्यमियों को सतत मदद प्रदान करता है।

वह कहते हैं, ‘‘हम इस बात से वाकई प्रोत्साहित हैं कि महिलाओं ने किस तरह से मज़बूत संबंध बनाए हैं और एक-दूसरे के आइडिया और बिज़नेस में पहले से ही मदद देना आरंभ कर दिया है। मैं व्यक्तिगत तौर पर महसूस करता हूं कि इस प्रोग्राम की सबसे बड़ी बात यह है कि प्रोग्राम के दौरान महिलाओं ने किस तरह एक-दूसरे से नाता जोड़ा है। मैं मज़बूती से यह महसूस करता हूं कि यह नेटवर्क और एडब्ल्यूई प्रोजेक्ट के ज़रिये मैत्री के जिस भाव में हमने मदद की है, वे इस प्रोजेक्ट से भी आगे काम करेंगे और इन महिलाओं के लिए आइडिया, शक्ति और एकजुटता का स्रोत साबित होंगे।’’

स्टीव फ़ॉक्स स्वतंत्र लेखक, पूर्व समाचारपत्र प्रकाशक और संवाददाता हैं। वह वेंटुरा, कैलिफ़ोर्निया में रहते हैं।