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एक फलदायी उद्यम

  • पूर्णिमा खंडेलवाल आईएनआई फ़ार्म्स की सह-संस्थापक और सीईओ हैं, जिसका फ़ोकस कामकाज में कुशलता, महिलाओं के साथ अच्छा व्यवहार, समान वेतन और खेती की ऐसी पद्धतियों पर हैं जो पर्यावरण अनुकूल और सदाजीवी हों।

पूर्णिमा खंडेलवाल के आईएनआई फार्म्स ने 5000 छोटे भारतीय किसानों को एक अभिनव योजना फार्म टू फोर्क मॉडल के तहत दुनिया के खुदरा खाद्य विक्रेताओं के साथ जोड़ा है।  


भारत की सफल महिला सीईओ के बारे में चार लेखों की शृंखला का यह दूसरा लेख है

आठ राज्यों और 35 देशों में सक्रिय आईएनआई फार्म्स भारत के सबसे रचनात्मक, सफल और तेजी से विकास करने वाले फल सप्लायरों में से एक है। फार्म टू फोर्क योजना के तहत कंपनी की भरसक कोशिश अपने ग्राहकों तक ताजे उत्पाद पहुंचाने की होती है और उसकी इसमें विशेषज्ञता भी है। कंपनी ने फार्म टू फोर्क मॉडल के तहत 5000 छोटे किसानों को विश्व के खुदरा खाद्य विक्रेताओं के साथ जोड़ दिया है। 

आईएनआई फार्म्स के वजूद के पीछे पूर्णिमा खंडेलवाल की दूरदृष्टि रही है। वह इसकी सहसंस्थापक होने के साथ इसकी सीईओ भी हैं। सेंट जेवियर्स कॉलेज कोलकाता और टी ए पई मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट से इकोनॉमिक्स और बिजनेस की पढ़ाई करने के बाद खंडेलवाल ने एक सफल कंसल्टिंग फर्म बनाई जो तकनीक, इंजीनयरिंग और कृषि जैसे विषयों पर केंद्रित थी। अपने कार्य के माध्यम से ही वह यह समझ पाईं कि भारतीय फल उद्योग खस्ताहाल में है और उसमें कुछ नया करने की गुंजाइश है। खंडेलवाल ने आईएनआई फार्म्स की स्थापना 2009 में की और उनका खास जोर प्रभावी कार्यपद्धति, महिलाओं के लिए समान वेतन और समानता जैसी नीतियों के साथ पर्यावरण के लिए सुरक्षित और सदाजीवी तौरतरीकों पर रहा। 

आज, खंडेलवाल ने आईएनआई फार्म्स को दुनिया भर में सफलता की मिसाल बना दिया है। कंपनी ने वैश्विक बाजार में 40,000 टन से ज्यादा ताजे केले, अनार और दूसरे फलों का निर्यात किया है। इन देशो में मलेशिया, मध्य-पूर्व के देश, यूरोप और तमाम दूसरे देश भी शामिल हैं। इतने केबाद भी आईएनआई की ऱफ्तार में कोई कमी नहीं दिखाई दे रही है।  

खंडेलवाल के अनुसार, ‘‘मुझे यह देख कर खुशी है कि हमारी कड़ी मेहनत और प्रतिबद्धता रंग लाई है। जब मैंने आईएनआई फार्म्स के साथ अपने सफर को शुरू किया तो अंतररराष्ट्रीय बाजार में भारत की उपस्थिति लगभग न के बराबर थी। इसकी वजह फसल कटाई के बाद सीमित संसाधन प्रणाली, निर्यात का सीमित तंत्र और विशेषज्ञता  का अभाव रही। हालांकि इस क्षेत्र में विकास की असीमित संभावनाएं थीं।’’

ऐसे विशाल संभावनाओं वाले बाजार को अपने हक में कर पाना भी आसान नहीं था। दूसरी तमाम चुनौतियों के अलावा खंडेलवाल को किसानों और कारोबारियों के दिमाग में घर जमाए ढेरों पूर्वग्रहों और धारणाओं से निपटने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पडी क्योंकि उन्होंने पहले किसी महिला कार्यकारी के साथ कार्य नहीं किया था। खंडेलवाल का कहना है, ‘‘जब मैंने कृषि के क्षेत्र में अपने कॅरियर की शुरुवात की तो आमतौर पर इस क्षेत्र में पुरुषों का आधिपत्य था। लेकिन उद्यमी बनने के मेरे हौसले को ऐसी स्थिति से कोई फर्क नहीं पड़ा। कंपनी की सोच पर मुझे पूरा विश्वास था और मेरे अंदर एक अनमोल वैश्विक ब्रांड तैयार करनेका जज्बा था।’’

पिछले सालों में इस उद्योग की सोच में आए बदलाव ने खंडेलवाल को हौसला दिया। उनका कहना है, ‘‘शुरुआत से ही कृषि और उससे संबंधित दूसरे क्षेत्रों में महिलाओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आज यह देख कर प्रेरणा मिलती है कि महिलाएं कृषि और इसके दायरे में आने वाले दूसरे व्यवसायों में सिर्फ खेतिहर मजदूर के रूप में नहीं बल्कि नेतृत्वकारी भूमिका निभाने की स्थिति में आ चुकी हैं।’’

आईएनआई फार्म्स की सफलता ने कारोबार में पैसा लगाने वालों और विकास में योगदान देने की सोच रखने वालों का ध्यान अपनी तरफ खींचा। अक्टूबर 2019 में अमेरिकी सरकार की एजेंसी ओवरसीज़ प्राइवेट इनवेस्टमेंट कॉरपोरेशन जो उसी वर्ष के अंत में अमेरिकी इंटरनेशनल डवलपमेंट कॉरपोरेशन (डीएफसी) में तब्दील हो गया, फोर्ड फाउंडेशन और सिटी इनक्लूसिव फाइनेंस ने मिलकर स्केलिंग इंटरप्राइज़ को शुरू किया, जो 10 करोड़ डॉलर की लोन गारंटी वाली सुविधा है। साथ ही, इस सुविधा से सिटी को उभरते बाजारों में निम्न आय वर्ग के समुदायों की उत्पाद और सेवा क्षेत्र में पहुंच बनाने के लिए शुरुआती दौर में स्थानीय मुद्रा में पैसे की मदद करने में सक्षम बनने में मदद मिली। इस सुविधा के तहत पहले दो ट्रांजेक्शन में से एक आईएनआई फार्म्स के साथ हुआ जहां सहभागियों ने भारत के छोटे किसानों को 50 लाख डॉलर की मदद का भरोसा दिलाने के साथ निर्यात बाजार तक उनकी पहुंच और कम से कम 20 प्रतिशत तक आय में वृद्धि के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई।

खंडेलवाल के गर्व है कि उन्होंने नई पीढ़ी की महिला उद्यमियों को एक रास्ता दिखाया है। उनका कहना है, ‘‘नई पीढ़ी की सभी महिलाओं को मेरी सलाह है कि वे खुद में यकीन करना सीखें और साथ ही ब्रांड की बेहतरी में अपने योगदान के बारे में सोचें। उन्हें किसी अप्रत्याशित रास्ते पर चलने में भी कोई डर नहीं होना चाहिए।’’

माइकल गलांट, गलांट म्यूजिक के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं। वह न्यू यॉर्क सिटी में रहते हैं।