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समावेशी विकास के लिए निवेश

  • डीएफ़सी के अधिकारी मिल्क मंत्र के दौरे पर। डीएफ़सी मिल्क मंत्र को एक करोड़ डॉलर का ऋण दे रहा है जिससे कि वह उड़ीसा से संचालित अपने डेरी प्रोसेसिंग और वितरण के काम का विस्तार कर सके। फोटोग्राफः साभार डीएफ़सी
  • मिल्क मंत्र महिला ग्रेजुएट को रोज़गार प्रदान करता है और प्रबंधन के रास्ते पर आगे बढ़ाने के लिए परामर्श सेवा भी मुहैया कराता है। फोटोग्राफः साभार डीएफ़सी
  • उड़ीसा में डीएफ़सी की सहायता से लाभान्वित माइक्रोफाइनेंस ग्राहक। फोटोग्राफः साभार डीएफ़सी

 इन्फ्रास्ट्रक्चर, कृषि और प्रौद्योगिकी जैसे अहम क्षेत्रों में निवेश और ऋण प्रदान करने के ज़रिये अमेरिकी इंटरनेशनल डवलपमेंट फाइनेंस कार्पोरेशन भारत में विकास को गति देने के साथ ही रोज़गार के अवसर प्रदान कर रहा है।


वर्ष 2018 में 5 अक्टूबर को बेटर यूटिलाइज़ेशन ऑफ़ इन्वेस्टमेंट्स लीडिंग टू डवलपमेंट (बिल्ड) अधिनियम हस्ताक्षर होने के बाद कानून बन गया। इस कानून से अमेरिका की वित्तीय विकास क्षमता एकल फेडेरल एजेंसी के तहत आ गई, जो  यू.एस. इंटरनेशनल डवलपमेंट फाइनेंस कार्पोरेशन (डीएफ़सी) है यानी अमेरिका का विकास बैंक। अपने गठन की शुरुआत से ही डीएफ़सी ने ऊर्जा, स्वास्थ्य देखभाल, अहम इन्फ्रास्ट्रक्चर और प्रौद्योगिकी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में निवेश किया है। दुनियाभर में डीएफ़सी ने 33 अरब डॉलर की सक्रिय प्रतिबद्धता जताई है और वह उभरती अर्थव्यवस्थाओं में लोगों की ज़िंदगी को बेहतर बनाने में मदद कर रहा है। डीएफ़सी ने छोटे कारोबारों और महिला उद्यमियों को भी वित्तीय मदद प्रदान की है, जिससे उभरती अर्थव्यवस्थाओं में रोज़गार के अवसर उत्पन्न हुए हैं।

भारत में प्रभाव

दक्षिण एशिया के लिए डीएफ़सी के क्षेत्रीय प्रबंध निदेशक अजय राव कहते हैं, ‘‘डीएफ़सी ने ऐतिहासिक तौर पर भारत में 200 प्रोजेक्ट के लिए ऋण, निवेश फंड और राजनीतिक जोखिम बीमा के रूप में 5.8 अरब डॉलर की प्रतिबद्धता जताई है।’’ उनके अनुसार, ‘‘हम भारत को उभरते बाज़ारों में आने वाली विकासात्मक चुनौतियों के लिए कम लागत वाले समाधान विकसित करने के तौर पर देखते हैं। आंशिक तौर पर डीएफ़सी की रणनीति भारतीय कंपनियों को सीमा पार कारोबार के लिए वित्तीय मदद उपलब्ध कराना है, दक्षिण एशियाई उपमहाद्वीप और दक्षिण-पूर्वी एशिया में अपनी गतिविधियों और निर्यात के विस्तार के लिए।’’

डीएफ़सी जिन चुनौतियों का समाधान तलाशने का प्रयास कर रहा है, उनमें छोटे, शुरुआती कारोबारों की अहम भूमिका है। हालांकि ये कारोबार रचनात्मक और प्रभावी समाधान प्रस्तुत करते हैं, लेकिन अक्सर उन्हें अपने कामकाज को विस्तार देने के लिए धन जुटाने में बाधाओं का सामना करना पड़ता है। अपने इंपैक्ट एंड इनोवशन इनिशिएटिव पोर्टफोलियो के तहत डीएफ़सी शुरुआती सामाजिक उद्यमों की वित्तीय खाई को पाटने में मदद करता है। उदाहरण के लिए, जून 2020 में डीएफ़सी ने मिल्क मंत्र में अपनी इसी पहल के तहत एक करोड़ डॉलर का निवेश किया। उड़ीसा से संचालित यह स्टार्ट-अप 60,000 छोटे किसानों से दूध लेकर पूर्वी भारत में डेरी उत्पाद बेचता है। इसके अलावा डीएफ़सी की तकनीकी मदद से मिल्क मंत्र के कृषि विस्तार और डिजिटल सेवा कार्यक्रमों पर अमल में भी मदद की गई जिससे छोटे ग्रामीण किसान लाभान्वित होते हैं और जिसमें महिला किसानों तक पहुंचने पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

डीएफ़सी ने मार्च 2021 में भारत के महिलाओं के स्वामित्व वाले उद्यमों समेत प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में कज़र् तक पहुंच को विस्तार देने के लिए 5 करोड़ डॉलर के निवेश की घोषणा की। दुनियाभर में महिलाओं द्वारा संचालित उद्यमों के लिए फंड की कमी रहती है और भारत में भी महिला उद्यमी करोड़ों डॉलर की वित्तीय खाई का सामना कर रही हैं। डीएफ़सी के 5 करोड़ डॉलर के निवेश से इस वित्तीय खाई को पाटने में मदद मिलेगी और उन लोगों तक कज़र् की पहुंच हो सकेगी जिन तक यह सेवा कम पहुंच पाई है। इससे नए रोज़गार के मौके पैदा होंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा। इस निवेश से डीएफ़सी के 2एक्स विमेन्स इनिशिएटिव को बढ़ावा मिलेगा, जिसके तहत विकासशील देशों में महिलाओं को सशक्त बनाने वाली परियोजनाओं में 4 अरब डॉलर निवेश की प्रतिबद्धता जताई गई है। इस निवेश का 40 प्रतिशत ऐसे संस्थानों द्वारा वितरित किया जाएगा, जो खास तौर पर महिलाओं को ही सेवा प्रदान करते हैं।

तकनीकी क्षेत्र: चिराटे एडवाइजर्स कंपनी लिमिटेड द्वारा प्रबंधित 2 करोड़ डॉलर तक के इक्विटी फंड के लिए प्रतिबद्धता, जिससे भारत में कार्यरत स्वास्थ्य तकनीक, कृषि तकनीक, कंज्यूमर मीडिया और सॉ़फ्टवेयर एज ए सर्विस कंपनियों में निवेश के माध्यम से तकनीकी क्षेत्र की मदद की जाएगी।

महिला कज़र्दार: इंडिया शेल्टर फाइनेंस कार्पोरेशन लिमिटेड के लिए 3 करोड़ डॉलर का फाइनेंस, जिससे भारत के विभिन्न राज्यों में ज्यादातर कम आय वर्ग की महिलाओं को कज़र् देने में मदद मिलेगी और जेंडर बराबरी और समावेश को बढ़ावा मिलेगा।

छोटे, मध्यम और बहुत छोटे उद्यम: आर्यधन फाइनेंस सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड को एक करोड़ डॉलर का कज़र्, जिससे बेहद छोटे, छोटे और मध्यम आकार के उपक्रमों को फसल आने के पश्चात उपज आधारित कज़र् दिए जाएंगे। इससे कृषि क्षेत्र को अतिरिक्त स्थायित्व मिलेगा और विकास को बढ़ावा मिलेगा।

दीर्घकालीन कज़र्: मोतीलाल ओसवाल होम फाइनेंस लिमिटेड को 5 करोड़ डॉलर का फाइनेंस, जिससे पूरे भारत में कम आय वाले लोगों को दीर्घकालीन कज़र् मिल सकेगा और इससे देश में वित्तीय समावेश और आर्थिक स्थायित्व को बढ़ावा मिलेगा।

सितंबर 2021 में डीएफ़सी और यूएसएड ने संयुक्त रूप से 5.5 करोड़ डॉलर की क्रेडिट गारंटी स्पॉंसरशिप की घोषणा की, जिससे कि किसान उत्पादक संगठन, कृषि-तकनीक से जुड़ी कंपनियों और कृषि क्षेत्र में स्वच्छ ऊर्जा समाधानों के लिए कार्यरत कंपनियों के लिए कज़र् में सहायता कर कोविड-19 महामारी के आर्थिक प्रभाव से जूझा जा सके। इस प्रोग्राम को इंडिया कोविड रिस्पांस प्रोग्राम फ़ॉर एग्रीकल्चर ट्रांजिशन नाम दिया गया है। यह आठ वर्षीय प्रोग्राम पूरे देश में दो लाख से अधिक किसानों तक पहुंचेगा।

जैसन चियांग स्वतंत्र लेखक हैं। वह सिल्वर लेक, लॉस एंजिलीस में रहते हैं।