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अमेरिका में निवेश

  • जून 2021 में वर्चुअल सलेक्टयूएसए सम्मेलन के दौरान अमेरिका के श्रम मंत्री मार्टिन वाल्श (ऊपर दाएं से), अमेरिकी वाणिज्य मंत्री जीना रैमांडो और सीमेंस कार्पोरेशन की प्रेसिडेंट एवं सीईओ बारबरा हंपटन। फोटोग्राफ: साभार @सलेक्टयूएसए/ट्विटर
  • सलेक्टयूएसए सम्मेलन 2021 के दौरान बायोकोन लिमिटेड की कार्यकारी चेयरपर्सन किरण मजूमदार शॉ (बिल्कुल ऊपर बाएं) और न्यू जर्सी के गवर्नर फिल मर्फी (ऊपर) ने अमेरिकी में निवेश पर अपने विचार व्यक्त किए। बायोकोन ने अमेरिका में अपने विस्तार के लिए न्यू जर्सी को चुना। फोटोग्राफ: साभार @सलेक्टयूएसए/ट्विटर
  • सलेक्टयूएसए की कार्यकारी निदेशक डीना बोमोंट (दाएं) ने सैन्फर्ड, नॉर्थ कैरोलाइना में भारत फोर्ज से मुलाकात की, उन्हें अमेरिका में एल्युमिनियम फोर्जिंग मिल लगाने पर बधाई देने के लिए। भारत फोर्ज बहुराष्ट्रीय कंपनी है और इसका मुख्यालय पुणे में है। फोटोग्राफ: साभार @सलेक्टयूएसए/ट्विटर

अमेरिका में निवेश की योजना बना रही कंपनियों की मदद के लिए उपलब्ध है मददगार साथी: सलेक्टयूएसए।


सलेक्टयूएसए को शायद सबसे अधिक अपने वार्षिक सम्मेलन के लिए जाना जाता है, जिसमें कारोबारियों को ऐसे आर्थिक विकास संगठनों के साथ लाया जाता है जो नगर या राज्य के भागीदारों का प्रतिनिधित्व करते हैं। सलेक्टयूएसए एजेंसी कंपनियों को वन-टू-वन सहायता प्रदान करती है, जिससे कि वे जानकारी के आधार पर निर्णय कर सकें। इसकी सेवाओं में अमेरिकी नियमन और कारोबारी नियमों को स्पष्ट करना, आंकड़े और शोध रिपोर्ट मुहैया कराना, कंपनियों को किसी भौगोलिक क्षेत्र के चयन में मदद करना और संभावित भागीदारों और संसाधनों के साथ नाता जोड़ने में मदद करना शामिल है। मदद के लिए किसी तरह के न्यूनतम कारोबार का बंधन नहीं है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि ब्रेंडा वैनहॉर्न कहती हैं, ‘‘लघु से लेकर मध्यम दर्जे की कंपनियाें का वास्तव में हमारे यहां ज़्यादा आकर्षण है।’’

सभी क्षेत्रों की कंपनियां सलेक्टयूएसए के साथ काम कर सकती हैं। पुणे आधारित भारत फोर्ज नॉर्थ कैरोलाइना में एक बड़ा संयंत्र बना रही है जिससे ऑटोमेटिव और ट्रांसपोर्टेशन उद्योग को सामान की आपूर्ति होगी। मुंबई की सिपला फ़ार्मास्यूटिकल्स सलेक्टयूएसए के साथ काम कर मेसाच्यूसेट्स में नवीनतम तकनीक का प्रयोग कर इनहेलर बनाने का कारखाना लगा रही है। यह तकनीक फिलहाल भारत के अलावा और कहीं अस्तित्व में नहीं है।

सलेक्टयूएसए द्वारा अमेरिका में निवेश में दिलचस्पी रखने वाली विभिन्न क्षेत्रों की कंपनियों से भागीदारी की जाती है। इनमें मैन्युफैक्चरिंग और तकनीकी क्षेत्र शामिल है। इसके स्पेशलिटी प्रोग्राम में तकनीकी क्षेत्र में कंपनियां स्थापित करने वाली, उद्यमिता में सक्रिय और कारोबारी पदों पर कार्यरत महिलाओं के लिए छह माह का एक नया सलेक्ट ग्लोबल वुमेन इन टेक मेंटॉरशिप नेटवर्क शामिल है। वैनहॉर्न का कहना है, ‘‘हमें कांग्रेस से इस बात निर्देश मिला है कि अमेरिका में रोज़गार के अवसर बढ़ाए जाएं। हम अमेरिकी कंपनियों को विदेश में निर्यात में मदद कर ऐसा करते हैं। और हम दूसरे देशों की कंपनियों को अमेरिका में निवेश में मदद कर ऐसा करते हैं।’’

इस बार का सम्मेलन वर्चुअल तरीके से हुआ, लेकिन फिर भी इसमें भाग लेने वालों के लिए यह सफल साबित हुआ। वैनहॉर्न के अनुसार,  ‘‘वर्ष 2021 के सम्मेलन में भारत की नौ कंपनियों ने अपनी बात रखी। तीन कंपनियों को राज्यों के गवर्नरों से उनके राज्य में कारोबार करने को लेकर मुख्य सत्र में सीधे बातचीत करने का अवसर मिला।’’

भारत नियमित तौर पर सलेक्टयूएसए सम्मेलन में हर साल अपना बड़ा प्रतिनिधिमंडल भेजता है। सलेक्टयूएसए की रीजनल इनवेस्टमेंट स्पेशलिस्ट शामली मेनन कहती हैं कि एजेंसी के भारत में अपने कर्मचारी हैं, जो अमेरिका और भारत के बीच विशेष संबंधों की महत्ता का सबूत है। सम्मेलन में शार्क टैंक शैली का स्टार्ट-अप पिच प्रोग्राम सलेक्टयूएसए टेक अपने पहले ही साल में इतना अधिक सफल रहा कि इसके लिए जगह कम पड़ गई और लोगों को दरवाज़े से वापस भेजना पड़ा। दुनियाभर में जिन भी कंपनियों ने इसमें आवेदन किया था, उनमें से दो भारतीय कंपनियां प्रतिस्पर्धा के लिए चुनी गईं। 

लेकिन सलेक्टयूएसए की सेवाएं सम्मेलन के इतर भी उपलब्ध हैं। वैनहॉर्न के अनुसार, ‘‘एजेंसी पूरे साल कंपनियों की मदद के लिए उपलब्ध है।’’ वह इस बात को भी रेखांकित करती हैं कि सलेक्टयूएसए का बहुत-सी सरकारी एजेंसियों के साथ नाता रहता है और वे कंपनियों को उनसे संपर्क करा सकते हैं। वैनहॉर्न कहती हैं, ‘‘बहुत-से लोग हैं, जो मदद कर सकते हैं। भारत में छोटे कारोबारियों के लिए यह पता करना मुश्किल हो सकता है कि पहले किसके पास जाएं। उन्हें सबसे पहले हमारे पास आना चाहिए। हम उन्हें यह सेवा उपलब्ध कराते हैं कि कौन लोग उनकी मदद कर सकते हैं।’’

अमेरिका में निवेश का सबसे बड़ा लाभ, जिसके बारे में सबसे कम जानकारी होती है, वह यह है कि इससे कंपनी को अमेरिकी बाज़ार में इसके सभी व्यापारिक समझौतों के चलते विशेष जगह मिल जाती है। वैन हॉर्न के अनुसार, ‘‘किसी कंपनी के एक बार अमेरिका में निवेश करने पर वह अमेरिकी कंपनी बन जाती है, इससे वे उन सभी सुविधाओं का लाभ उठा सकती है जो अमेरिकी कंपनियों को उपलब्ध हैं, चाहे कंपनी का कार्पोरेट मुख्यालय कहीं भी हो। जब भी हमारा मुक्त व्यापार समझौता होगा, तो वे भी अमेरिकी कंपनी के तौर पर इसकी पात्र होंगीं।’’ उनके अनुसार, ‘‘यह भी एक कारण है कि कंपनियां अमेरिका की तरफ देखती हैं और अमेरिका निवेश के मामले में पहले स्थान पर बना हुआ है। हमारे पास सिर्फ दुनिया का सबसे समृद्ध उपभोक्ता बाज़ार ही नहीं है, बल्कि हमारे पास ये महान व्यापार समझौते और मुक्त व्यापार समझौते भी हैं। हम दुनिया में कारोबार करने के लिहाज से सबसे आसान ठिकाना है क्योंकि हमारे यहां नियमन कड़े हैं और बौद्धिक संपदा का संरक्षण होता है। कानून के जिस शासन के तहत हम काम करते हैं और रहते हैं, उससे कारोबार करना यहां वाकई आसान हो जाता है।’’

भविष्य के मद्देनज़र वैनहॉर्न का विचार है कि अमेरिका में निवेश की आवश्यकता बढ़ सकती है क्योंकि महामारी ने आपूर्ति शृंखला के प्रबंधन की महत्ता के बारे में सिखा दिया है, सिर्फ समय पर स्टॉक पहुंचने का दौर चला गया। वह कहती हैं, ‘‘हमें महामारी ने सिखा दिया है कि ऐसी स्थिति में होना बड़ा खतरनाक है जब आपको जीवनरक्षक सामान उपलब्ध हो पाए क्योंकि वह एक खास जगह बनता है और वह जगह बंद है। अपनी कंपनी को ऐसी स्थिति में रखना बड़ी कमज़ोरी हो जाती है। सम्मेलन में एक के बाद एक वक्ताओं ने इस बारे में बताया कि वे अपनी योजनाएं बदल रहे हैं, कि किस तरह से आपूर्ति शृंखला को छोटा करने की आवश्यकता है। भारत की जो कंपनियां विस्तार करने पर विचार कर रही हैं, उन्हें देखना चाहिए कि उनका बाज़ार कहां है और उस बाज़ार तक पहुंचने के लिए छोटी से छोटी आपूर्ति शृंखला के बारे में सोचना चाहिए।’’

कैनडिस याकोनो पत्रिकाओं और समाचारपत्रों के लिए लिखती हैं। वह सदर्न कैलिफ़ोर्निया में रहती हैं।