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भारत के छोटे कारोबारों के लिए सौर कर्ज़

  • सीकेर्स फाइनेंस एंड इलेक्ट्रॉनिका फाइनेंस लिमिटेड के साथ सहभागिता में 15 प्रोजेक्टों के लिए 8 लाख डॉलर का ऋण उपलब्ध कराया गया है। इन प्रोजेक्ट में टेक्सटाइल, मैन्युफैक्चरिंग, खाद्य प्रसंस्करण और पैकेजिंग जैसे उद्योग शामिल हैं। फोटोग्राफ: साभार यूएसएड इंडिया

भारत में  छतों पर सौर ऊर्जा के उपकरण लगाने के लिए यूएसएड और डीएफसी ने कर्ज देने का कार्यक्रम शुरू किया है जिससे यहां भरोसेमंद स्वच्छ और किफायती ऊर्जा के स्रोत का दायरा बढ़ेगा।


हालिया वक्त में, भारत में लोगों तक बिजली पहुंचाने के काम में काफी प्रगति हुई है। हालांकि स्वच्छ ऊर्जा तक पहुंच काफी कम है और शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में स्पष्ट अंतर दिखता है। भारत ने नवीनीकृत ऊर्जा के  स्रोतों के विस्तार को लेकर एक मह्त्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है लेकिन इसके लिए रूफ टॉप सोलर जैसे ज़मीनी स्तर के समाधानों में निवेश बढ़ाने की आवश्यकता होगी।

युनाइटेड स्टेट एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डवलपमेंट (यूएसएड) और अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय डवलपमेंट फाइनेंस कॉरपोरेशन (डीएफसी)  ने इस साल की शुरुआत में भारत में छोटे और मझोले उद्यमों (एसएमई) के नवीनीकृत ऊर्जा संबंधी समाधानों के लिए चार करोड़ दस लाख डॉलर का कर्ज उपलब्ध कराने की घोषणा की है। इसमें रूफ टॉप सोलर पैनल भी शामिल हैं। भारत में उद्योग जगत में खपत होने वाली कुल ऊर्जा का आधा इसी तरह के उद्यमों में होता है, इसलिए इस तरह के कर्ज उपलब्ध कराने से भरोसेमंद स्वच्छ और किफायती ऊर्जा तक पहुंच के दायरे का विस्तार होगा, कार्बन उत्सर्जन कम होगा और हवा की गुणवत्ता बेहतर हो सकेगी। 

भारत में व्यावसायिक और औद्योगिक क्षेत्रों मे महंगी दरों पर बिजली खरीदी जाती है। इसलिए उनके लिए छतों पर सौर पैनल लगाना किफायती बिजली में निवेश के जैसा है। लेकिन, लघु एवं मध्यम इकाइयां और आवासीय उपभोक्ताओं को छतों पर सौर पैनल लगाने वाले खर्च के लिए धन जुटाने में दिक्कत होती है। इस चुनौती के मुकाबले के लिए, यूएसएड और डीएफसी ने इस नए लोन प्रोग्राम के लिए न्यू यॉर्क स्थित पर्यावरण केंद्रित निवेश फर्म इनकरेज कैपिटल के अलावा दो भारतीय गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों सीकेर्स फाइनेंशियल और इलेक्ट्रॉनिका फाइनेंस लिमिटेड के साथ सहभागिता की है।

सीकेर्स फाइनेंस के कार्यकारी निदेशक जयंत प्रसाद के अनुसार, ‘‘भारत की पारंपरिक प्रोजेक्ट फाइनेंसिंग मार्केट में एक खास तरीके का नजरिया चलता है जो छोटे प्रोजेक्ट के लिए उपयुक्त नहीं होता। सीकेर्स इसी खाली स्थान को भरने के लिए है। इस इकोसिस्टम में बहुत से लोग युवा हैं- यह क्षेत्र महज 5 से 10 साल पुराना है- इसीलिए इस क्षेत्र और इसमें हाथ आजमा रहे लोगों के बारे में बहुत अच्छी समझ नहीं है।’’

इनकरेज कैपिटल की तरफ से कराए गए एक स्वतंत्र अध्ययन के अनुसार, भारत में एसएमई के लिए रूफ टॉप सोलर मार्केट में 15 गीगावॉट की क्षमता है और वित्तीय संस्थानों के लिए यह 9 अरब डॉलर के बाजार की उपलब्धता का अवसर भी है। इनकरेज कैपिटल के मैनेजिंग पार्टनर एडम वॉलफेंसॉन के अनुसार, ‘‘बिजली की बढ़ती मांग, महंगी होती बिजली और सौर ऊर्जा की घटती दरों के बीच एसएमई कम कार्बन उत्सर्जन के साथ अपनी बिजली की जरूरतों को पूरा करने के लिए रूफटॉप सोलर के जरिए एक रास्ता निकाल सकते हैं, लेकिन उसके लिए पैसों का बंदोबस्त अभी भी एक बाधा है।’’ उनका कहना है, ‘‘हमारा लक्ष्य विशेषीकृत वित्तीय संस्थाओं से हाथ मिलाते हुए इन्ही बाधाओं से पार पाने का है। हम इस बाजार में रूफ टॉप सोलर के विकास के लिए पूंजी उपलब्ध कराने के अलावा अभिनव और व्यावसायिक वित्तीय समाधान के लिए ज़रूरी ऑपरेशनल असिस्टेंस भी उपलब्ध कराते हैं।’’

यूएसएड इंडिया में सीनियर क्लीन एनर्जी स्पेशलिस्ट अनुराग मिश्रा का कहना है कि, तीन महीनों से भी कम समय में सीकेर्स फाइनेंस एंड इलेक्ट्रॉनिका फाइनेंस लिमिटेड के साथ सहभागिता में 15 प्रोजेक्टों के लिए 8 लाख डॉलर का ऋण उपलब्ध करा दिया गया। इन प्रोजेक्ट में टेक्सटाइल, मैन्युफैक्चरिंग, खाद्य प्रसंस्करण और पैकेजिंग जैसे उद्योग शामिल हैं। उन्होंने बताया, ‘‘अगले छह महीनों में हमारा लक्ष्य 49 रूफ टॉप सोलर प्रोजेक्ट, गांवों में सौर ऊर्जा से चलने वाली 50 माइक्रो कोल्ड चेन्स और दूरदराज के ग्रामीण इलाकों में 350 बैंक शाखाओं में सौर ऊर्जा उपलब्ध कराने ने के लिए 40 लाख डॉलर का कर्ज उपलब्ध कराना है।’’

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी की ‘‘इंडिया एनर्जी आउटलुक 2021’’ स्पेशल रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2040 तक भारत की ऊर्जा मांग दुनिया में सबसे ज्यादा हो जाएगी। इस दृष्टि से सदाजीवी ऊर्जा के क्षेत्र में काम शुरू हो चुका है लेकिन इसके लिए जरूरत है कि एसएमई जैसे उद्यमों में लंबे समय के  लिए विशेष तरीके से निवेश हो। यूएसएड नवीनीकृत ऊर्जा के रूफटॉप सोलर क्षेत्र के लिए ऋण सुविधा के इस कार्यक्रम में गुणवत्ता और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिहाज से लगातार तकनीकी सहायता को जारी रखेगा। रूफटॉप सोलर को लगाने में आने वाली वित्तीय बाधाएं जब कम हो जाएंगी, तब भारत में उपभोक्ताओं को इस सदाजीवी ऊर्जा को अपनाने के असली फायदे मिल पाएंगे।

जैसन चियांग स्वतंत्र लेखक हैं और वह सिल्वर लेक, लॉस एंजिलीस में रहते हैं।