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महिला उद्यमियों की मदद

  • अमेरिकी दूतावास नई दिल्ली के नॉर्थ इंडिया ऑफ़िस द्वारा आयोजित एक कार्यशाला।
  • नॉर्थ इंडिया ऑफ़िस ने चंडीगढ़ में महिला उद्यमियों के सशक्तिकरण के लिए दो दिवसीय कार्यशाला शीव्लॉग्स आयोजन कियाऔर कारोबार की ब्रांडिंग रणनीति के लिए 60 सेकिंड का वीडियो बनाने का प्रशिक्षण दिया गया। फोटोग्राफ: साभार @USAndIndia/Twitter

अमेरिकी दूतावास की सहायता से चलने वाली तमाम पहलों के माध्यम से उत्तर भारत की महिला उद्यमियों को फायदा हो रहा है।


कंपनी बनाने के एक विचार को आगे ले जाना और उसे एक सफल उपक्रम में तब्दील कर पाना चनौतियों से भरी यात्रा यात्रा होती है, जहां मदद के लिए बढ़ा एक हाथ सफलता या असफलता का फर्क ला सकता है। महिला उद्यमियों के लिए तो यह खासतौर पर सही है क्योंकि, महिला उद्यमियों पर साल 2020 की मास्टर कार्ड इंडेक्स की रिपोर्ट के अनुसार भारत में कुल उद्यमियों में महिला उद्यमियों का प्रतिशत सिर्फ 5.2 है।

समस्या को समझते हुए अमेरिकी दूतावास, नई दिल्ली के नॉर्थ इंडिया ऑफ़िस ने क्षेत्र की महिला उद्यमियों को बढ़ावा देने के लिए तमाम पहलों के लिए अनुदान की अवधारणा पर काम किया और अनुदान उपलब्ध कराया।

इन पहलों का फायदा उठाने वालों में उदयपुर स्थित अंगिरस इंड प्राइवेट लिमिटेड की सह-संस्थापक और बिजनेस डवलपमेंट हेड कुंजप्रीत अरोड़ा भी हैं। उनकी कंपनी सौ फीसदी कंस्ट्रक्शन वेस्ट की रीसायकलिंग करके हरित कचरा प्रबंधन तकनीक के इस्तेमाल से ईंटें और पेवर ब्लॉक बनाने का काम करती है।

अरोड़ा उन 100 महिला उद्यमियों में शामिल हैं जिन्होंने संभावित निवेशकों के लिए तैयार किए जाने वाले प्रस्ताव की तैयारी के लिए आयोजित चार वर्चुअल वर्कशॉप में हिस्सा लिया। इन वर्कशॉप में मार्केटिंग, प्राइसिंग स्ट्रेटेजी और वित्तीय प्रबंधन जैसे विषयों पर फोकस किया गया। ये वर्कशॉप, राजस्थान महिला उद्यमियों से संबंधित कार्यक्रम का हिस्सा थीं जिसे अलायंस फॉर कमर्शलाइजेशन एंड इनोवेशन रिसर्च (एसीआईआर) और नेक्सस स्टार्ट-अप हब के सौजन्य से आयोजित किया गया था। 

अरोड़ा के अनुसार, ‘‘इस प्रोग्राम से मुझे अपने लक्षित बाजार को पहचानने और एक खास सेगमेंट में अपना कारोबार शुरू करने में सहायता मिली। वर्कशॉप के सत्रों और अभ्यास के दौरान मुझे अपने श्रोताओं से संवाद का मौका मिला और मुझे बाजार की जरूरतों के हिसाब से अपना उत्पाद तैयार करने में मदद मिली।’’

इस प्रोग्राम ने प्रतिभागियों के लिए शोध के निष्कर्षों को एक भरोसमेद कारोबार में बदलने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाने में मदद की।

जयपुर स्थित स्टार्ट-अप बायोसॉल्व इनोवेशंस प्राइवेट लिमिटेड की संस्थापक मौसमी देबनाथ के अनुसार, ‘‘नेक्सस और एसीआईआर के प्रोग्राम मेरी आंख खोलने वाले थे जिनके कारण मैं वास्तव में उद्यमिता के चरणों को समझ पाई।’’ देबनाथ की कंपनी हेल्थ केयर और लाइफ साइंस के क्षेत्र में जैवतकनीक उत्पादों को तैयार करती है। वह  बताती हैं, ‘‘प्रशिक्षण के दौरान लगातार मार्गदर्शन, उद्यमी के रूप में मेरी यात्रा का महत्वपूर्ण चरण था।’’

जिन महिलाओं ने वर्कशॉप में हिस्सा लिया, वे उसके बाद भी लगातार संपर्क में बनी रहीं। एसीआईआर के अध्यक्ष और संस्थापक एरिक एजुलाई के अनुसार, ‘‘वर्कशॉप खत्म होने के बाद भी इन प्रोग्रामों का असर खत्म नहीं होता। एसीआईआर के महिला कार्यक्रमों में एक खास बात यह है कि इसमें वर्कशॉप के बाद भी जरूरतमंदों को ऑनलाइन मदद दी जाती है। एसीआईआर एक अलाभकारी संस्था है जो आर्थिक वृद्धि और विकास के उद्देश्यों के प्रति समर्पित है। एरिक एजुलाई का कहना है, ‘‘वर्कशॉप की वजह से प्रोग्राम में हिस्सा लेने वाली महिला उद्यमियों के बीच सदाजीवी संबंधों को कायम करने में मदद मिली। अपने साथियों के साथ संपर्क और जागरूकता इन महिला उद्यमियों के लिए इस कारण महत्वपूर्ण होती है ताकि वे अपनी उद्यम यात्रा को ठोस रूप देने में खुद को अकेला न समझें।’’ 

अमेरिकी विदेश विभाग से वित्तपोषित इन वर्कशॉप में महिला उद्यमियों ने यह भी सीखा कि अपने कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए किस तरह से उन्हें एक मिनट का डिजिटल वीडियो तैयार करना है। ये कैलिफोर्निया स्थित सीनफायर फाउंडेशन, चेन्नै, हैदराबाद, कोलकाता, मुंबई और नई दिल्ली में लक्षित थीं।

एक दूसरे प्रोग्राम, द एकेडमी फॉर वुमेन ऑन्ट्रेप्रिन्योर्स (एडब्लूई) ने सौर ऊर्जा कंपनी थिंकरॉ इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को अपने लक्ष्य पर बने रहने में सहायता दी। एडब्लूई के प्रोग्राम 50 से ज्यादा देशों में चलते हैं और इसे उत्तर भारत में एनआईओ की तरफ से लागू किया गया है। इसे अमेरिकी विदेश विभाग के ब्यूरो ऑफ एजूकेशनल एंड कल्चरल अफेयर्स से फंड दिया जाता है।

थिंकरॉ इंडिया की सह-संस्थापक अमृता जगतदेव के अनुसार, ‘‘हमारा मकसद सौर और इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स तकनीक को दूरदराज के इलाकों तक ले जाने का है ताकि किसानों को उससे फायदा मिल सके।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हमारी कोशिश सरल समाधान देने की है ताकि महिला उद्यमियों को कृषि, मछली और प्रॉन फार्मिंग के लिए प्रोत्साहित करने में मदद मिले। इस प्रोग्राम से हमें लक्षित बाजार और कमाई के बारे में अपनी नीति निर्धारण में मदद मिल सकी। यही नहीं, इसकी मदद से हमें बाजार की जरूरत के हिसाब से उत्पाद तैयार करने के लिए फंड की व्यवस्था के मकसद से निवेशकों की तलाश में भी मदद मिली।’’

अमेरिकी दूतावास की यह पहल, उद्यमियों के तात्कालिक उद्देश्यों पर फोकस करती हैं लेकिन इसका मकसद प्रतिभागी महिलाओं को इस तरह से प्रेरित करने का भी है ताकि वे दूसरों की मदद करना भी सीख सकें। अमेरिकी दूतावास की पब्लिक डिप्लोमेसी ऑफिसर कैथरीन फिशर के अनुसार, ‘‘उत्तर भारत का हमारा कार्यालय अपनी स्थापना के साथ करीब आधे दशक से महिला उद्यमिता के क्षेत्र में काम कर रहा है। महिला उद्यमियों ने अमेरिकी दूतावास की वर्कशॉप में हिस्सा लिया और उद्यमिता के विविध आयामों पर चर्चा की। हर किसी के मसले के साथ महिला उद्यमियों के सामने आने वाली समस्याओं के सामूहिक समाधान का प्रयास भी किया गया। इसके अलावा दूसरों को महिला उद्यमियों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रेरित भी किया गया।’’

उनका कहना है, ‘‘मूल तौर पर एक उद्यमी होने का मतलब खुद को आगे बढ़ाने की जद्दोजहद है। हर वर्कशॉप का कोई न कोई खास लक्ष्य होता है, लेकिन समग्र रूप से हमारी उम्मीद महिलाओं को लगातार प्रेरित करते रहने और उन्हें आगे बढ़ाने की होती है। उसके बाद आपके पीछे आने वालों की सहायता भी जरूरी है।’’

फिशर ने ध्यान दिलाया कि, इन पहलों ने उस प्राकृतिक संसाधन पर फोकस किया है जिन पर लंबे समय से ध्यान नहीं दिया गया था।

वह कहती हैं, ‘‘कई मायनों मे महिलाएं हमेशा से उद्यमी रहीं हैं- बस उनकी पहचान उस रूप में नहीं हो पाती। रोजाना दुनिया भर में महिलाएं अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए नए रास्तों की तलाश करती हैं। महिला उद्यमिता, अब तक जो कुछ महिलाएं घरों की चारदीवारी में कर रही थीं, उसे ही बड़े बाजार तक पहुंचाना और एक तरह से उससे पैसे बनाना ही तो है। दुनिया ने आख्रिरकार उन चीजों का मूल्य देखना देखना और श्रेय देना शुरू कर दिया जो महिलाओं की बदौलत हो रही हैं।’’

स्टीव फ़ॉक्स स्वतंत्र लेखक, अखबार के पूर्व प्रकाशक और रिपोर्टर हैं। वह वेंचुरा, कैलिफ़ोर्निया में रहते  हैं।