menu

विशेषज्ञों के आदान-प्रदान से विज्ञान के क्षेत्र में कॅरियर

  • गुडेपाल्या आर. रूद्रमूर्ति अपनी फ़़ुलब्राइट-नेहरू पोस्ट डॉक्टरल फ़ेलोशिप के लिए जॉर्जिया स्थित यू.एस. सेंटर्स फ़ॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन परिसर में।

अमेरिका में सीडीसी में फुलब्राइट-नेहरू फेलोशिप के तहत गुडेपाल्या रुद्रमूर्ति के प्रोजेक्ट ने संक्रामक बीमारियों पर शोध में उनकी दिलचस्पी को आगे बढ़ाने में मदद की।


मैं, अमेरिका में अटलांटा, जॉर्जिया में सेंटर फॉर डिज़ीज़ कंट्रोल (सीडीसी) की पॉक्स वायरस और रेबीज़ शाखा के रोगलक्षण और रोगजनक जैसी संवेदनशील शाखा में 2018 से 2020 तक फुलब्राइट-नेहरू पोस्टडॉक्टरल रिसर्च फेलो रहा। नेशनल सेंटर फॉर एडवांसिंग ट्रांसलेशनल साइंसेज़ (एनसीएटीएस-एनआईएच) के साथ सहभागिता में चलने वाले इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य रेबीज वायरस के खिलाफ सूक्ष्म से सूक्ष्म अवरोधकों का पता लगाना था।

भारत और दूसरे विकासशील देशों में रेबीज़ लोक स्वास्थ्य की दृष्टि से चिंता का महत्वपूर्ण कारण बना हुआ है। लक्षण प्रकट होने के बाद किसी भी दूसरे वायरस के मुकाबले इससे सबसे ज्यादा मौतें होती हैं। मौजूदा वक्त में, रेबीज़ वायरस के खिलाफ कोई भी पुष्ट एंटीवायरल इलाज उपलब्ध नहीं हैं। स्वास्थ्य चिकित्सकों और शोधार्थियों के लिए रेबीज़ से होने वाली मृत्यु दर एक चुनौती बनी हुई है, इसीलिए इसकी पहचान और उसे श्रेणियों में बांटते हुए उससे निपटने के लिए कारगर दवाओं को विकसित किए जाने पर जोर दिया जाना जरूरी है।

सीडीसी में, मैं रेबीज से जुड़ी कई तरह की शोध पहलों से संबद्ध रहा जिसमें, एंटी वायरल स्क्रीनिंग, रोग के फैलने के तरीकों का अध्ययन, उच्च क्षमता वाली डायगनॉस्टिक प्रणाली का विकास और क्रिस्पर-कास तकनीक जैसी जीनोम एंडिंग प्रणाली के माध्यम से मेजबान कारकों की पहचान शामिल है। सीडीसी में एनसीएटीएस- एनआईएच से हासिल किए गए सूक्ष्म कणों का उच्च क्षमता वाली तकनीक के जरिए अध्ययन किया जाता है। इसके चलते शोधार्थी फिर से संयोजित हो जाने वाले रेबीज़ वायरस का इस्तेमाल करते हुए तेजी के साथ बहुतायत में जांच कर पाने में सक्षम हो जाते हैं।

फुलब्राइट-नेहरू ़फेलोशिप ने मुझे विज्ञान के क्षेत्र में अपना कॅरियर बनाने में एक बड़ा योगदान दिया है। मुझे कैंसस स्टेट यूनिवर्सिटी ने फुलब्राइट-नेहरू फेलोशिप के आउटरीच लेक्चरिंग फंड के माध्यम से रेबीज वायरस रोधी शोध पर व्याख्यान देने के लिए निमंत्रित किया था। सीडीसी में मेरे फैकल्टी होस्ट डॉ. सुब्बियन सतेशकुमार पनयमपल्ली बेहद उदार और मददगार किस्म के इंसान हैं जो हर मुश्किल वक्त में मेरे साथ खड़े रहे। युनाइटेड स्टेट्स-इंडिया एजुकेशनल फाउंडेशन और इंटरनेशनल एजुकेशन टीम की तरफ से फेलोशिप की पूरी समयावधि में मिली मदद काबिलेतारीफ रही।

मैंने अपनी पीएच.डी. जवाहरलाल नेहरू टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी, हैदराबाद (जेएनटीयू-एच) से हासिल की। मेरी डॉक्टरल रिसर्च आईसीएआर-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वेटेरिनरी एपिडिमियोलॉजी एंड डिज़ीज इन्फोमैटिक्स (आईसीएआर-एनआईवीईडीआई) बेंगलुरू में प्रिंसिपल साइंटिस्ट डॉ. पी.पी. सेनगुप्ता के देखरेख में पूरी हुई। मेरी डॉक्टरल रिसर्च का उद्देश्य ट्रिपेनोसोमोसिस के खिलाफ सूक्ष्म डायगॉनॉस्टिक्स का विकास करना है जिसमें पीसीआर आधारित डॉयगनॉस्टिक्स और सीरोलॉजिकल डॉयगनॉटिक्स शामिल हैं जहां रिकॉम्बिनेंट प्रोटीन और मोनोक्लोनल एंडीबॉडीज़ की पड़ताल की जाती है। 

वर्तमान में, मैं फाउंडेशन फॉर नेगलेक्टेड डिज़ीज़ रिसर्च (एफएनडीआर) बेंगलुरू में बतौर साइंटिस्ट (वीरोलॉजी) काम कर रहा हूं। एफएनडीआर, में बीएसएल-2 और बीएसएल-3 जैसी शानदार और सुव्यवस्थित रिसर्च लैबोरेटरी हैं जहां, बैक्टीरिया, वायरस, फंगी और दूसरे संक्रामक जैविकों से होने वाली ऐसी बीमारियों के बारे में जानकारी बढ़ाने के लिए शोध किया जाता जिन्हें अनदेखा किया जाता रहा है। एफएनडीआर में, मैं वीरोलॉजी शाखा का नेतृत्व कर रहा हूं और मेरे दायित्वों में बीएसएल-2 और बीएसएल-3 जैसी वीरोलॉजी रिसर्च लैबोरेटरीज़ की स्थापना, एंटीवायरल की पहचान और उनकी श्रेणियों को तय करने के अलावा वीरोलॉजी रिसर्च की संभावनाओं का विस्तार शामिल है।

एफएनडीआर में विषाणु विज्ञान शोध के मौजूदा दौर में कोविड-19 महामारी से मुकाबले के लिए सार्स-सीओवी-2 के संक्रमण के खिलाफ सघन एंटीवायरल प्लेटफॉर्म के विकास का काम चल रहा है। मैं, सार्स-सीओवी-2 से मुकाबले के लिए कृत्रिम परिवेश में एंटीवायरल दवाओं की पहचान और उन्हें श्रेणीबद्ध करने के काम में लगा हुआ हूं। इसके अलावा, मैं प्री-क्लीनिकल अध्ययन के लिए जानवरों में सार्स-सीओवी-2 के संक्रमण और उनकी पुष्टि से संबंधित मॉडल तैयार करने में जुटा हूं। एफएनडीआर का उद्देश्य विषाणु विज्ञान शोध का विकास करने के अलावा रेबीज़ और डेंगू जैसी तमाम दूसरी बीमारियों के लिए दवाओं की खोज है।  

गुडेपाल्या रुद्रमूर्ति फाउंडेशन फॉर नेगलेक्टेड डिजीज रिसर्च, बेंगलुरू में विषाणु विज्ञान विशेषज्ञ हैं। वह 2018 से 2020 तक यूएस सेंटर्स फॉर डिज़ीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन में फुलब्राइट-नेहरू पोस्ट डॉक्टरल रिसर्च फेलो भी रह चुके हैं।