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मॉन्युमेंट वैली का अनूठा सौंदर्य

यूटा और न्यू मेक्सिको की सीमा पर दूर-दूर तक फैला विशाल नवाहो ट्राइबल पार्क हॉलीवुड की फिल्मों में तो दिखाया गया लेकिन पर्यटकों की नज़रों से यह छिपा ही रहा है।

लॉरेंज हॉलीडेऔर मैं जब घाटी से ड्राइविंग करते हुए जा रहे थे, तो लाल धूल का गुबार तेजी से पीछे छूट रहा था। इसी दौरान हमारी नज़र लकड़ी से बने एक बोर्ड पर पड़ी जिस पर लिखा था, ‘‘चेतावनीः इस इलाके में प्रवेश वर्जित है।’
दुबली-पतली कदकाठी के मृदुभाषी नवाहो ने मुझे कोहनी मारी और कहा, ‘‘फिक्र मत करो, दोस्त। तुम अब सही लोगों के साथ हो।’’ इस पार्क में सिर्फ कोई नवाहो ही किसी बाहरी व्यक्ति को 27 किलोमीटर लंबे उस खूबसूरत लूप मार्ग पर ले जा सकता है जो मॉन्युमेंट वैली ट्राइबल पार्क के बीच में है। यूटा-एरीज़ोना की सीमा पर 37,200 हैक्टेयर क्षेत्र में फैले इस ट्राइबल पार्क में खूबसूरत पहाडि़यां और चट्टानों के आर्च मन मोह लेते हैं।
40 साल के हॉलीडे ने काउबॉय वाले बूट पहने थे, काला हैट और हाथ की कलाकारी वाला चांदी का बेल्ट बकल। वह नवाहो संरक्षित क्षेत्र में भेड़ चराते हुए बड़ा हुआ और अभी भी इस क्षेत्र में वह एक रैंच का मालिक है। हाल के वर्षों में उसने इस क्षेत्र में आने वाले एडवेंचर ट्रेवलर्स को गाइड करने का काम शुरु किया है। हम हॉलीडेके रिश्तेदारों के यहां भी गए। वे लोग अभी भी घाटी और गुमनाम इलाके अनासाजी में खेती करते हैं। हमारे साथ अब हॉलीडेका 29 वर्षीय भाई इमानुएल भी आ चुका हैऔर हम 365 मीटर की ऊंचाई पर हंट्स मेसा पर रात को रुकने जा रहे थे। यह जगह घाटी के दक्षिणी किनारेपर सबसे ऊंचाई पर है।
हम दिन में काफी देर से अपने गंतव्य के लिए निकले। यहां से निकलकर हमने एक पगडंडी का रुख किया और उसके बाद कंटीले तारों की बाड़ के बीच से निकलकर हम एक सूखी नदी के साथ-साथ बने रास्ते पर चल दिए। यह स्थान मेसा के लिए बेस स्थल था। रात्रि विश्राम के लिए हमने जो जगह चुनी थी वह हमारे ठीक ऊपर थी लेकिन हमें वहां तक पहुचंने में करीब तीन घंटेका समय लगने वाला था। हमने बलुए पत्थरों से बनी ढलान के बीच से अपना रास्ता तय करना शुरू कर दिया। दोपहर बाद इन पत्थरों ने भी रंग बदलना शुरू कर दिया था और अब वे लाल रंग के दिखने लगे थे। इन रास्तों पर हमारा पाला छिपकलियों से पड़ा जो पहले तो हमें घूर रही थीं पर बाद में जमीन की दरारों में कहीं गुम हो गई। करीब एक घंटेके बाद हमें खड़ी चढ़ाई से थोड़ी राहत मिली। मैंने लॉरेंज से पूछा कि वह यहां कितनी बार आया है? मज़ाकिया लहज़े में उसने जवाब दिया और कहा, ‘‘नियमित रूप से, पांच साल में एक बार।’’ उसकी सांसें फूल रहीं थीं, लगे हाथ उसने यह भी कह डालाः ‘‘यहां की यह मेरी आखिरी यात्रा होगी।’
हमें अपने गंतव्य तक पहुंचते-पहुंचते अंधेरा हो चला था और हम बेहद थक चुके थे। हमने वहां आग जलाई और फिर रात के खाने की तैयारी में जुट गए। डिनर में हमने भुना मांस और आलू खाया और फिर नींद के आगोश में चले गए। अगली सुबह जब मैं अपने टेंट से बाहर आया तो मेरेसामने समूची मॉन्युमेंट वैली फैली हुई थी, छंटते अंधेरेके बीच गजब की खामोशी। जल्दी ही सूरज की सुनहरी किरणों ने पहाडि़यों पर फैलना शुरू कर दिया और पूरा माहौल बला की खूबसूरती से लबरेज़ हो गया। इस नज़ारे को देखकर यह समझ आ चुका था कि फिल्म निर्देशक जॉन फोर्ड ने स्टेजकोच और द सर्चर्स जैसी शानदार फिल्मों के लिए इस जगह को ही क्यों चुना।
मॉन्युमेंट वैली आज अमेरिका का सबसे जाना पहचाना लैंडस्केप है, और यकीनन इस काम के लिए जॉन फोर्ड धन्यवाद के पात्र हैं। दिक्कत यह है कि इतना सब कुछ होते हुए भी लोगों को इसके बारे में बहुत कम पता है। लोग फिल्मों में देखकर इसे पहचान तो जाते हैं लेकिन उससे ज्यादा कुछ नहीं। नवाहो पार्क और रीक्रिएशन विभाग के प्रोग्राम मैनेजर मार्टिन बगे का कहना है, ‘‘लोग यहां की भूगर्भीय संरचना, इतिहास और नवाहो लोगों के बारे में कुछ नहीं जानते और जानते भी हैंतो सिर्फ सतही तौर पर।’
दरअसल यहां पर कुछ भी आसान नहीं है।वैली की जगह को ही ले लीजिए, यह 67, 340 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली है जो नवाहो संरक्षित क्षेत्र का हिस्सा है। पार्क का प्रवेश द्वार यूटा में है जबकि इसका सबसे बेहतरीन चट्टानी इलाका एरीज़ोना में पड़ता है। इसे राष्ट्रीय पार्क का दज़र्ा नहीं दिया गया है जैसा कि यूटा में इसके निकटवर्ती कैन्यनलैंड्स और एरीजोना के ग्रैंड कैन्यन को हासिल है बल्कि इसे नवाहो लोगों के संरक्षण में चलने वाले छह ट्राइबल पार्कों में शामिल किया गया है। दिलचस्प बात यह है कि घाटी में अभी भी नवाहो लोगों की रिहाइश है, मौसम के हिसाब से 30 से 100 लोग तक। ये बिना बिजली-पानी की सुविधा के रहते हैं। पार्क के कार्यकारी अधीक्षक ली क्लाई का कहना है, ‘‘यहां इन लोगों के खेत और मवेशी हैं। अगर यहां लोगों की बहुत अवाजाही शुरू हो गई तो इससे इन लोगों की जीवनशैली प्रभावित हो सकती है।’’ हालांकि पार्क में सालाना करीब साढ़े तीन लाख पर्यटक आते हैं फिर भी यहां ऐसा महसूस होता है जैसे मम्मी-पापा की देखरेख में सब कुछ हो रहा हो। यहां पहाड़ी पर 6.4 किलोमीटर का एक जंगली रास्ता है जिसे लेफ्ट मिटन का नाम दिया गया है। इसके बारे में बहुत कम लोगों को मालूम है, चढ़ाई की तो बात ही दूर है। यहां जाने वालों को परमिट लेना पड़ता है। पार्क मे प्रवेश करते समय एक नवाहो महिला पांच डॉलर का प्रवेश शुल्क वसूलती है। पार्क की धूल भरी पार्किंग में गाड़ी खड़ी करते ही वहां टूर ऑपरेटर, घोड़ों की पीठ पर सैर कराने वालों, चांदी का काम करने वाले और बुनी हुई लोई बेचने वालों का जमावड़ा देखने को मिलता है।
लेकिन यह सब बदल सकता है। पार्क में दिसंबर 2008 में द व्यू नाम से नवाहो द्वारा पहला होटल खोला गया। 95 कमरों के इस होटल की लीज एक नवाहो कंपनी ने नवाहो नेशन से ली है। यहां 2009 में नए सिरे से सुसज्जित विज़िटर सेंटर खोला गया जिसमें स्थानीय भूगर्भीय संरचना के साथ नवाहो संस्कृति के बारे में बताया गया है।
पूरी 19वीं सदी तक यहां बसने वाले श्वेत लोग मॉन्यूमेंट वैली क्षेत्र को -आमतौर पर दक्षिण-पश्चिम के निर्जन भूभाग की तरह- मुश्किलों से भरा और बदसूरत समझते थे। इसे खोजने वाले शुरुआती अमेरिकी सैनिकों ने इसका वर्णन निर्जन और विकर्षित करने वाली जगह के रूप में किया। इसी साल अमेरिका से युद्ध में मेक्सिको को यह इलाका गंवाना पड़ा। 1849 में कैप्टन जॉन जी. वॉकर ने इस इलाके के बारे में कहा, ‘‘जहां तक नज़र जाती है, यहां बलुए पत्थरों की पहाडि़यां दिखती हैं जिन पर किसी भी तरह की वनस्पतियां नहीं हैं, बस थोड़े-बहुत देवदार के पेड़ हैं।’
लेकिन इस घाटी के अलग-थलग रहने का एक फायदा भी हुआ। दक्षिण-पश्चिम का शुष्क और बिखरी आबादी वाला क्षेत्र इसी कारण से बाहरी दुनिया से अपनी हिफाज़त कर पाने में सफल हुआ। इस बात के कोई पुख्ता प्रमाण नहीं हैकि 17वीं और 18वीं सदी में स्पेन के खोजी लोग इस जगह का पता लगा पाए, हालांकि वे लोग इस इलाके में काफी घूमे और उनका नवाहो लोगों से संघर्ष भी हुआ। नवाहो खुद को दाइन यानी लोग कहा करते थे। नवाहो जिस इलाके में रहते थे उसे आज फोर कॉर्नर्स कहा जाता है। यहीं यूटा, एरीज़ोना, कोलोरैडो और न्यू मेक्सिको का मिलन होता है। स्थानीय लोग मॉन्यूमेंट वैली को क्लीयरिंग अमंग द रॉक कहते हैं और इसे रिहाइश की ऐसी विशाल जगह मानते हैं जिसके उत्तर में दरवाजे पर ग्रे व्हिसकर्स और सेंटीनेल नाम की ऊंची चट्टानें मौजूद हैं। इन लोगों की मान्यता है कि मिटन की दो ऊंची पहाडि़यां किसी देवी के दो हाथ हैं।
जब अभिनेता जॉन वेन ने पहली बार इस जगह को देखा तो कहाः ‘‘तो यह वह जन्नत है जो ईश्वर ने वेस्ट को बख्शी है।’
ऐसा माना जाता है कि घाटी में घुसने वाले पहले गैर इंडियन लोग मेक्सिको के कर्नल जोस एंतोनियो विज़कारा के सैनिक थे जिन्होंने 1822 में एक हमले में 12 स्थानीय लोगों को पकड़ लिया था। 1863 में अमेरिकी सैनिक और वहां बसने वाले एंग्लो लोगों की नवाहो लोगों से भिड़ंत होने के बाद संघीय सरकार ने शांति बहाली के लिए प्रत्येक नवाहो पुरुष, स्त्री और बच्चे को दक्षिण पूर्व में 563 किलोमीटर दूर न्यू मेक्सिको के वॉस्क रेदोंदो संरक्षित क्षेत्र में भेजने का फैसला किया। लेकिन जब अमेरिकी कर्नल किट कारसन के सैनिकों ने नवाहो लोगों को ले जाने की प्रक्रिया शुरू की तो तमाम नवाहो वहां से भाग निकले। ये नवाहो लोग दक्षिणी यूटा के नवाहो पहाड़ी क्षेत्र में स्थानीय अमेरिकी शरणार्थियों के साथ हो लिए और यहां वे कबीलाई नेता हशकेनी के संरक्षण में चले गए। नवाहो 1868 में तब वापस आए जब अमेरिकी सरकार ने इन लोगों के बारेमें अपनी पहले की नीतियों में बदलाव करते हुए इनके साथ एक समझौता किया। समझौते के तहत इन लोगों को एरीज़ोना और न्यू मेक्सिको की सीमा पर संरक्षित क्षेत्र देने का फैसला किया गया। शुरुआत में इस क्षेत्र में मॉन्यूमेंट वैली को शामिल नहीं किया गया था। संरक्षित क्षेत्र के उत्तर-पश्चिमी कोने पर स्थित इस इलाके का इस्तेमाल नवाहो के अलावा दूसरे स्थानीय लोग भी करते थे, इसलिए इस क्षेत्र को सार्वजनिक क्षेत्र माना गया।
इस समय तक पूर्व दिशा से आने वाले यात्री लगभग न के बराबर थे। समृद्धि काल में अमेरिकी पर्यटकों ने यूरोपीय रॉकीज़ और कैलिफोर्निया के जंगलों को ज़्यादा प्राथमिकता दी। इस सोच में बदलाव की शुरुआत हुई 19वीं सदी के प्रारंभ के साथ, जब एंग्लो कलाकारों ने अपनी कलाकृतियों में दक्षिण-पश्चिम के खूबसूरत नज़ारों को कैद करना शुरू किया और लोगों ने मूल अमेरिकी संस्कृति में दिलचस्पी लेना शुरू किया। इंडियन व्यापारियों के जरिए भी मॉन्यूमेंट वैली की खूबसूरती के चर्चे चारों तरफ फैले। यहां से सबसे करीबी रेलवे स्टेशन 290 किलोमीटर दूर एरिज़ोना के फ्लैगस्टाफ में था। यहां आने के लिए एक हफ्ते का टूर बनता था और जाहिर है ऐसे में खासतौर पर एडवेंचर टूरिज्म वाले ही यहां आ पाते थे। 1913 में लोकप्रिय पश्चिमी लेखक जेन ग्रे काफी दिक्कतों का सामना करते हुए यहां पहुंचे और फिर वह यहां की अजनबी दुनिया देख कर दंग रह गए। उन्होंने लिखा, ‘‘यह विशालकाय ऊंचे और पथरीले पहाड़ों की अजब दुनिया है जो एक खूबसूरत कलाकृति के नमूने की तरह है। यह सुनसान वीरान में घने जंगलों से घिरे एकांत में है।’’ इस इलाके में रात बिताने के बाद ग्रे ने यहां घुड़सवारी की और गगनचुंबी मिटन पहाडि़यों की छाया में घाटी के खुशबूदार ढलानों की सैर की। घाटी के माहौल से प्रेरित होकर ग्रे ने बाद में वाइल्ड फायर नामक उपन्यास लिखा। इसी वर्ष बाद में राष्ट्रपति थियोडोर रूज़वेल्ट यूटा के रेनबो ब्रिज के दौरे पर जाते समय मॉन्यूमेंट वैली होते हुए गए। 1916 में कुछ पर्यटकों ने घाटी में फोर्ड गाड़ी के सफर का आनंद उठाया। नेशनल पार्क सर्विस के सेकंड डायरेक्टर होरेस अल ब्राइट उन कुछ मानवशास्त्रियों, पुरातत्वविदों और वन संरक्षण विशेषज्ञों में से थे जिन्होंने दोनों महायुद्धों के बीच यहां का दौरा किया। उनका सोचना था कि 1931 के निरीक्षण के बाद यह पार्क पूरी तरह से एक संरक्षित क्षेत्र घोषित होने का संभावित दावेदार था। लेकिन वॉशिंगटन में इस बात को लेकर ज्यादा उत्साह नहीं था। घाटी में आज भी कहीं-कहीं खड़ंजे वाली सड़केंभी नहीं है और शायद इसी कारण यहां की सड़कों को बिलीगोट हाईवेज़ यानी मवेशियों के लायक सड़कों के नाम से पुकारा जाता था।
इस दौरान मॉन्यूमेंट वैली के स्वामित्व को लेकर हालात लगातार बदलते रहे। नवाहो लोगों के इतिहास पर कई किताबें लिखने वाले लेखक रॉबर्ट मैकफरसन के अनुसार, ‘‘यह जगह दशकों तक मूल अमेरिकियों और एंग्लो लोगों के स्वामित्व के बीच झूलती रही क्योंकि इन लोगों को लग रहा था कि यहां सोने और कच्चे तेल के भंडार हैं।’’ नवाहो लोगों को उनकी संपत्ति तभी वापस मिल पाई जब श्वेत लोगों को यह यकीन हो गया कि यहां खनन बेकार है। 1933 में यूटा के ब्लांडिंग में हुए एक समझौते के तहत मॉन्यूमेंट वैली में पड़ने वाली पेयूट पट्टी को नवाहो के लिए संरक्षित क्षेत्र बना दिया गया। आखिरकार बाद में सारी घाटी ही नवाहो क्षेत्र में तब्दील हुई। लेकिन वैली का भाग्य तय करने वाला समझौता हॉलीवुड में हुआ।
वर्ष 1938 में ‘‘लंबी कदकाठी और छरहरे बदन वाला गैरी कूपर जैसी काउबॉय स्टाइल वाला’’ एक शख्स लॉस एंजिलिस के युनाइटेड आर्टिस्ट स्टूडियो में आया और वहां मौजूद रिसेप्शनिस्ट से पूछा कि एक पश्चिमी फिल्म की शूटिंग के लिए लोकेशन खोजने के बारे में क्या वह किसी से बातचीत कर सकता है। हैरी गोल्डिंग मॉन्यूमेंट वैली के उत्तर-पश्चिम छोर पर छोटा-मोटा कारोबार करते थे। कोलोरैडो के रहने वाले गोल्डिंग 1925 में घाटी आए, उस समय घाटी संरक्षित क्षेत्र नहीं थी। अपने मिलनसार और मददगार स्वभाव के कारण वह नवाहो लोगों के बीच खासे लोकप्रिय थे। मुश्किल समय में वह नवाहो लोगों की आर्थिक मदद भी करते थे। हालात बदले, मंदी, सूखे और ज़्यादा चरवाही ने नवाहो लोगों के साथ गोल्डिंग के कारोबार को बुरी तरह से प्रभावित किया। इसी दौरान उन्होंने रेडियो पर सुना कि हॉलीवुड को अपनी फिल्म के शूट के लिए लोकेशन की तलाश है। बस फिर क्या था होल्डिंग और उनकी पत्नी लिओन, जिसे माइक नाम से भी पुकारा जाता था, ने इस मौके को खुद के साथ इंडियन लोगों के जीवन को सुधारने के मौके के रूप में देखा।
‘‘मैंने और माइक ने तय कर लिया कि हम हॉलीवुड जाएंगे और अपने साथ वैली की तस्वीरें ले जाएंगे। शायद कुछ बात बन जाए।’’ उन लोगों ने इन तस्वीरों के साथ अपने बिस्तर और कैंपिंग गेयर को समेटा और फिर निकल पड़े लॉस एंजिलिस की तरफ।
गोल्डिंग के अनुसार युनाइटेड आर्टिस्ट के रिसेप्शनिस्ट ने पहले तो उनको नजरंदाज ही किया लेकिन जब उन्होंने ऑफिस में ही अपने बोरिया बिस्तर खोल कर जम जाने और रात वहीं सोने की बात कही तो गोल्डिंग को बाहर का रास्ता दिखाने के लिए एक एक्जिक्यूटिव बुला लिया गया। इसी दौरान गोल्डिंग ने अपने पास मौजूद एक फोटो -मिटन के सामने घेड़े पर सवार एक नवाहो- को दिखाया। थोड़ी देर बाद ही वे उन तस्वीरों को 43 वर्षीय जॉन फोर्ड और उनके साथ मौजूद प्रोड्यूसर वॉल्टर वेंगर को दिखा रहे थे। गोल्डिंग जब लॉस एंजिलिस से रवाना हुए तब उनके हाथ में पांच हजार डॉलर के चेक के साथ मॉन्यूमेंट वैली में शूट करने के लिए जाने वाले क्रू को ठहराने के प्रबंध का ऑर्डर था। नवाहो लोगों को भी एक्स्ट्रा का काम मिला। यहां तक कि फोर्ड ने 15 डॉलर साप्ताहिक की पगार पर स्थानीय स्तर पर लोगों का इलाज़ करने वाले हास्तिन त्सो को भी फिल्म में काम दिया। फिल्म 1939 में रिलीज़ हुई। फिल्म का नाम था स्टेज कोच। इसमें पूर्व स्टंटमैन जॉन वेन ने अभिनय किया था। फिल्म ने दो एकेडमी पुरस्कार जीते और वेन स्टार बन गए। इसने फिल्म जगत में वेस्टर्न शैली को आदर दिलाया।
इसके बाद फोर्ड ने यहां छह और फिल्में शूट कीं- माई डार्लिंग क्लीमेंटाइन (1946), फोर्ट अपाशे (1948), शी वोर ए येलो रीबन (1949), द सर्चर्स (1956), सार्जेंट रटलेज़ (1960) और शेयेन ऑटम (1964)। इन फिल्मों ने जहां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वैली की खूबसूरती को लोगों तक पहुंचाया, वहीं इन पर खर्च हुए हजारों डॉलर स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के काम आए। शूटिंग के समय उत्सव जैसा माहौल होता था। सैकड़ों नवाहो गोल्डिंग के ट्रेडिंग पोस्ट के आसपास इकट्ठा होते थे। वहां वे काम पाने के साथ स्टंटमैन के करतब भी देखते थे और देर रात तक ताश वगैरह खेलते थे। फोर्ड को नवाहो लोगों ने अपना मान लिया था और वे उसे एक आंखवाला नाम से भी पुकारते थे, क्योंकि उसकी एक आंख में खराबी थी। फोर्ड ने भी इस अपनेपन का अहसान चुकाया और 1949 में जब भारी बर्फबारी से यह इलाका बाहरी दुनिया से कट गया, तब उसने तमाम नवाहो परिवारों के लिए पैराशूट से खाना और जरूरी सामान यहां तक पहुंचवाया।
मॉन्युमेंट वैली में हरेक फ़िल्म की शूटिंग से स्थानीय अर्थव्यवस्था को हज़ारों डॉलर का फायदा पहुंचता। जल्दी ही इसने अपने अनूठे सौंदर्य के बूते लोगों की निगाहों में आदर्श वेस्टर्न लैंडस्केप के रूप में अपने लिए जगह पक्की कर ली।
ऐसा बताया जाता है कि जब पहल पहल वेन ने इस जगह को देखा था तभी उसने कहा, ‘‘तो यह वह जन्नत है जो ईश्वर ने वेस्ट को बख्शी है।’’ लाखों अमेरिकी इस बात से सहमत होंगे। जल्दी ही वैली खासी लोकप्रिय हो गई और इसके घुमावदार लैंडस्केप लोगों के जेहन में घर करने लगे। ढेरों पर्यटक अब यहां पहुंचने लगे। 1953 तक गोल्डिंग के पत्थरों के दो केबिन ने शानदार मोटल का रूप ले लिया था जिसमें एक रेस्तरां भी था। इसे नवाहो लोग चलाते थे। वैली में लोगों की बढ़ती आवाजाही से निपटने और अनसाज़ी अवशेष तलाशते खोजियों को हतोत्साहित करने के लिए संरक्षण समूहों ने वैली को नेशनल पार्क बना देने का प्रस्ताव रख दिया, लेकिन इस पर नवाहो नेशन गवर्निंग काउंसिल और ट्राइबल काउंसिल को आपत्ति थी। इन्हेंवैली के इंडियन निवासियों और इसकी चराई की जमीन का संरक्षण चाहिए था। 1958 में काउंसिल ने मॉन्युमेंट वैली के 12,066 हेक्टेयर क्षेत्र को पहले ट्राइबल पार्क के रूप में मान्यता दे दी जिसे नवाहो लोगों को नेशनल पार्क की तर्ज पर चलाना था। इन लोगों को यहां की सड़कों को सुधारने और एक विजिटर सेंटर बनाने के लिए 2 लाख 75 हजार डॉलर भी दिए गए। नवाहो संरक्षित क्षेत्र में स्थित यह पार्क आज पर्यटकों के लिए सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। विंडो रॉक एरिजोना के पूर्व निदेशक और साठ के दशक की शुरुआत में नवाहो पार्क रेंजर्स के प्रशिक्षण में मदद करने वाले, मार्टिन लिंक का कहना है, ‘‘नवाहो नेशन ने दूसरे तमाम मूल अमेरिकी समूहों को पार्क बनाने की प्रेरणा दी।’’
गोल्डिंग के ट्रेडिंग पोस्ट की जगह आज 73 कमरों के शानदार मोटल कॉम्प्लेक्स ने ले ली है। पर यहां उनकी स्मृतियों को संजोए एक दुकान अब भी है। हैरी गोल्डिंग की 1981 में मौत हो गई जबकि माइक की मृत्यु 1992 में हुई। 1925 का मूल स्टोर अब एक म्यूज़ियम की शक्ल ले चुका है जिसमें घाटी में फिल्माई गई तमाम फिल्मों के पोस्टरों और स्टिल्स को दर्शाया गया है। यहां तक कि गोल्डिंग के मिट्टी और पत्थरों से बने उस तहखाने को भी संरक्षित किया गया है जिसे शी वोर ए येलो रिबन फिल्म में कैप्टन नाथन ब्रिटेल्स (वेन) का घर बनाया गया था। यहां पर एक छोटेसिनेमाघर में आज भी रात के शो में जॉन वेन की फिल्में दिखाई जाती हैं।
हंट मेसा के शिखर पर रात गुजारने के बाद, अपनी यात्रा के अंत में मैंने तय किया कि अब मॉन्यूमेंट वैली की मशहूर खंभेनुमा पहाडि़यों के बीच मैदान में कैंप किया जाए। इसकी व्यवस्था करने के लिए लॉरेंज हॉलीडे मुझे अपने अंकल और आंटी रोज़ और जिमी याज़ी से मिलाने ले गया। उनके खेत तक बालू की सड़क गई थी। ये वृद्ध दंपत्ति ज़्यादा अंग्रेजी नहीं जानते थे, इसलिए हमारे आने के मकसद को लॉरेंज ने उन्हें समझाया। फिर ये लोग थोड़ी सी फीस लेकर अपने खेत के कोने में मुझे कैंप करने देने के लिए राजी हो गए।
फिर मैंने शाम ढलने पर उस कोने में थोड़ी सी आग जलाई और अकेले बैठ कर पहाड़ के बदलते रंग को देखता रहा- पहले नारंगी, और फिर लाल रंग को गहराते हुए देखा। थोड़ी दूरी पर दो याजी पुत्र करीब एक दर्जन जंगली घोड़ों को हांक कर ले जा रहेथे जिनसे धूल का गुबार उठ रहा था।
मैं सोच रहा था कि जॉन फोर्ड इससे बेहतर जगह नहीं चुन सकते थे।
 
 
टॉनी पेरॉट एक इतिहासकार और यात्रा लेखक हैं। वह स्मिथसॉनियन के लिए लिखते रहते हैं।