खानपान से मैत्री की खुशबू

जाने-माने शेफ सीमाओं के दायरे से कहीं आगे जाकर पारंपरिक भारतीय व्यंजनों में अमेरिकी सामग्री का इस्तेमाल कर रहे हैं।

नतासा मिलास

जुलाई 2022

खानपान से मैत्री की खुशबू

भारत में अमेरिकी उत्पादों की बढ़ती उपलब्धता से भारतीय उपभोक्ताओं को अपने रोजमर्रा के जीवन में अपने खानपान में अमेरिकी उत्पादों को शामिल करने के अधिक अवसर मिल पाते हैं। फोटोग्राफ साभार: नेचर्स बास्केट

क्या आपने कभी डक समोसा या तंदूरी टर्की का स्वाद चखा है? अमेरिकी सेब, कैलिफोर्निया का बादाम, प्रून्स, ब्लूबेरी, डक और टर्की जैसी अमेरिकी सामग्रियों के इस्तेमाल के साथ भारतीय शेफ अपने देश की सीमाओं को लांघ कर पारंपरिक व्यंजनों को दूसरी संस्कृतियों की पाक कला के साथ जोड़ कर एक नया रूप देने की कोशिश कर रहे हैं। भारतीय पारंपरिक सामग्री बाजार और ई-रिटेल के जरिए ग्राहकों को अपने रोजमर्रा के भोजन में अमेरिकी सामग्रियों को शामिल करने की उपलब्धता बढ़ गई है। अमेरिकी उत्पादों की उच्च गुणवत्ता और भोजन के शौकीनों की रचनात्मकता ने इस तरह के सांस्कृतिक आदान-प्रदान के लिए शानदार जमीन तैयार कर दी है।

अमेरिका का जायका

2021 में 28 अक्टूबर से लेकर 31 दिसंबर तक द टेस्ट ऑफ अमेरिका फूड फेस्टिवल आयोजित किया गया जिससे भारतीय बाजार में नई सामग्रियों को उतारने में मदद मिलने के साथ, पाक कला की जरूरतों और भोजन की आड़ में चलाए जा रहे नकली कारोबारी संबंधों की पहचान में भी सहायता मिली। इस महोत्सव का आयोजन अमेरिकी खाद्य सामग्री और पेय पदार्थों को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से अमेरिका की विदेशी कृषि सेवा के नई दिल्ली स्थित अमेरिकी कृषि विभाग (यूएसडीए) और भारतीय खुदरा कारोबारी संस्थान नेचर्स बास्केट के मुंबई, नई दिल्ली, कोलकाता, बेंगलुरू और पुणे स्थित स्टोरों पर आपसी सहयोग से किया गया। नेचर्स बास्केट के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी देवेंद्र चावला के अनुसार, ‘‘नेचर्स बास्केट में, हमने हमेशा से सर्वश्रेष्ठ अंतरराष्ट्रीय व्यंजनों और उत्पादों को अपने ग्राहकों को परोसा है। यूएसडीए और द टेस्ट ऑफ अमेरिका महोत्सव के साथ हमारे शानदार जुड़ाव से हमें विभिन्न तरह के अमेरिकी व्यंजनों को परोसने का मौका मिला जिससे हमारे ग्राहकों की खुशी का  ठिकाना न रहा।’’

शेफ नताशा गांधी ने महोत्सव के सांस्कृतिक और पाक कला संबंधों को अपनाते हुए अमेरिका और भारत के व्यजनों को मिलाकर डिश तैयार कीं। वे उन पांच भारतीय शेफ में से एक थीं जो इस कार्यक्रम का हिस्सा थीं और उन्होंने पारंपरिक भारतीय व्यंजनों में अमेरिकी सामग्रियों का तड़का लगा कर उसे खास बनाने में मदद की। व्यंजनों को लेकर उनकी तैयारियों का फोकस थैंक्सगिविंग जैसे अवसर पर था।

A woman holding a dish with a roasted turkey

शेफ नताशा गांधी ने अमेरिकी उत्पादों को स्थानीय फ़्लेवर के साथ मिलाकर डक क्रेनबेरी समोसा, मलवानी डक क्रेप्स और तंदूरी रोस्टेड टर्की तैयार कीं। फोटोग्राफ साभार: नताशा गांधी

उनका कहना है, ‘‘मैं थैक्सगिविंग अभियान का हिस्सा थी जहां मुझे अमेरिका की टर्की, डक और क्रैनबैरीज़ जैसे शानदार उत्पाद मिले जिनका इस्तेमाल मैं ़फ्यूजन रेसेपी तैयार करने में किया करती थी। ये रेसेपी स्थानीय जायके के साथ अमेरिकी उत्पादों के लिए मेरे प्रेम के प्रतीक जैसी थीं, जिन्हें खाते हुए मैं बड़ी हुई। मैंने एक डक क्रैनबरी कीमा समोसा, मालवानी डक क्रेप्स और एक तंदूरी रोस्टेड टर्की बनाने का फैसला किया। इन रेसेपी की पड़ताल करते हुए मुझे इस बात का पता चला कि अपनी पाक कला के जरिए मैं किस तरह से अपनी सीमाओं के दायरे को और विस्तार दे सकती हूं क्योंकि इन उत्पादों के इस्तेमाल का वह पहला मौका था।’’

यूएसडीए में विदेश सेवा के अधिकारी मार्क रॉसमैन का कहना है कि इस कार्यक्रम ने भारतीय शेफ की अपनी रचनात्मक सीमाओं से बाहर जाकर मदद की। उनके अनुसार, ‘‘इस कैंपेन ने भारत में उपलब्ध उच्च गुणवत्ता वाली अमेरिकी सामग्रियों जैसे कैलिफोर्निया के अखरोट, पिस्ता, क्रैनबरी, ब्लूबेरी, हेजलनट, पीकैंस को काफी प्रचारित किया।’’

इस कार्यक्रम ने भारतीय बाजारों में अमेरिकी खाद्य और पेय पदार्थों के लिए विशाल संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला। इसके आर्थिक प्रभावों के बारे में यूएसडीए की रिपोर्ट के अनुसार, ई-रिटेल और स्टोरों के माध्यम से महाराष्ट्र में सर्वाधिक बिक्री हुई, उसके बाद कर्नाटक का नंबर आता है जहां क्रमवार 257,000 और 100,000 डॉलर की सामग्री की बिक्री  हुई। रॉसमैन के अनुसार, ‘‘आठ सप्ताहों की अवधि के दौरान, अमेरिकी खाद्य और पेय उत्पादों की बिक्री कुल मिलाकर करीब 400,000 डॉलर की थी जिन्हें 272 अमेरिकी स्टॉक कीपिंग इकाइयों (एसकेयू) में तैयार किया गया था। उत्पादों की श्रेणी की बात करें तो इसमें 65 प्रतिशत उपभोक्ता केंद्रित पैकेज्ड भोजन, उसके बाद ताजे फल (20 प्रतिशत), ड्राई या संसाधित फ्रूट्स (12 प्रतिशत), मीट (2 प्रतिशत) और पेय पदार्थ (1 प्रतिशत) शमिल थे।’’

द टेस्ट ऑफ अमेरिका फेस्टिवल कैंपेन ने भारतीय बाजारों में मौजूद मांग की पहचान में मदद करने के साथ मुख्य अमेरिकी उत्पादों को ठीक थैंक्सगिविंग और क्रिसमस के मौके पर भारतीय बाजार में उतार दिया। रॉसमैन के अनुसार, ‘‘इस गतिविधि के नतीजे में, अमेरिकी पॉल्ट्री जैसे डक और टर्की को एसकेयू के नेचर्स बास्केट पोर्टफोलियो में शामिल कर लिया गया जो पहले नहीं था।’’

टेस्ट ऑफ अमेरिका फूड फेस्टिवल का खास लाभ यह हुआ कि भारत के उपभोक्ताओं को उपलब्ध उत्पादों के साथ उनकी स्वस्थ प्रकृति और उपलब्ध विकल्पों के बारे में जानकारी मिल सकी। रॉसमैन आगे बताते हैं, ‘‘टेस्ट ऑफ अमेरिका कैंपेन और भारत में प्रमोशन की गतिविधियों के कारण स्थानीय खाद्य उद्योग को इन अमेरिकी सामग्रियों के स्वास्थ्य और दूसरे तमाम फायदों के बारे में जानकारी मिल सकी। इनमें अमेरिकी उत्पादों की गुणवत्ता और उनका पूरी तरह से सुरक्षित होना जैसे दो महत्वपूर्ण बिंदु भी शामिल हैं जिनका इस्तेमाल वे अपने खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता और जायका बढ़ाने के लिए कर सकते हैं।’’

संपर्कों का सूत्रधार

टेस्ट ऑफ अमेरिका कैंपेन ने स्थानीय खाद्य उद्योग और अमेरिकी निर्यातकों के बीच एक महत्वपूर्ण  सेतु तैयार करने का काम किया। जैसा कि  रॉसमैन कहते हैं, ‘‘द टेस्ट ऑफ अमेरिका कैंपेन ने स्थानीय खाद्य उद्योग को भविष्य के कारोबारी अवसरों की दृष्टि से अमेरिकी कंपनियों और उनके प्रतिनिधियों के साथ जोड़ दिया।’’

टेस्ट ऑफ अमेरिका फूड फेस्टिवल के दौरान, जैसा कि रॉसमैन इंगित करते हैं, ‘‘भारत मे उपभोक्ताओं को रोजाना इस्तेमाल होने वाली, फटाफट तैयार की जा सकने वाली रेसेपी के फायदों से परिचित कराया गया। इनके बारे में टेस्ट ऑफ अमेरिका के ट्विटर और इंस्टाग्राम सोशल मीडिया पेजों पर भी पोस्ट किया गया।’’ इस तरह से, नए उत्पादों को स्थानीय जायके के साथ जोड़ा जा सकता है। इसके अलावा, रॉसमैन के मुताबिक, ‘‘भारत में उपभोक्ताओं को उच्च गुणवत्ता वाले, स्वादिष्ट और स्वास्थ्यवर्धक अमेरिकी उत्पादों और उनकी सामग्रियों के बारे में जानकारी हासिल हो सकी।’’ यह बेहद महत्वपूर्ण है कि भारत में स्थित यूएसडीए कार्यालयों और नेचर्स बास्केट जैसे सहयोगी अमेरिकी खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता और स्वास्थ्य के लिए उनके फायदों के बारे में लगातार शिक्षित करते रहे जिसका इस्तेमाल बेहतर जीवनशैली और प्रतिरोधक प्रणाली को बेहतर बनाने में भी  किया जा सकता है।

पाक कला से जुड़ी इन दो संस्कृतियों के मिलन की कहानी दो देशों के बीच एक सहकारी भावना को बयां करती है। खाद्य उत्पादों का आयात और फिर उसे स्थानीय संस्कृति के साथ मिश्रित करना परस्पर संबंधों को व्यक्त करने का एक बेहतरीन तरीका है। गांधी के अनुसार, ‘‘टेस्ट ऑफ अमेरिका कैंपेन के साथ जुड़ना हमेशा से एक सम्मान की चीज रही है। यह अमेरिकी सामग्रियों के साथ लजीज भोजन तैयार करने में रचनात्मकता को दर्शाने का शानदार मौका है।’’ यह स्पष्ट है कि इस महोत्सव के परिणामस्वरूप अमेरिका और भारत के बीच ढेर सारे जायकेदार संबंधों की स्थापना हुई है।

नतासा मिलास स्वतंत्र लेखिका हैं। वह न्यू यॉर्क सिटी में रहती हैं।



  • विनोद चतुर्वेदी भोपाल मध्य प्रदेश

    खानपान के बारे में नताशा का लेख व दृष्टिकोण शानदार है । उनको शुभकामनाएँ।

    टिप्पणियाँ

    “खानपान से मैत्री की खुशबू” को एक उत्तर

    1. विनोद चतुर्वेदी भोपाल मध्य प्रदेश कहते हैं:

      खानपान के बारे में नताशा का लेख व दृष्टिकोण शानदार है । उनको शुभकामनाएँ।

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