menu

और लेख

  • 30 करोड़ लोगों को चश्मों की ज़रूरत है, लेकिन इनमें से सिर्फ 4 करोड़ की ही नेत्र चिकित्सा और चश्मों तक पहुंच है। बदलाव की पहल ग्रामीण रमा देवी बताती हैं कि मैंने सबसे पहला चश्मा 2006 में अपने ही गांव के नरसिम्हा रेड्डी को बेचा था। उन्होंने बताया कि वह कतई घबराई हुई नहीं थीं क्योंकि वह पहले से ही तरह-तरह के आइटम बेचती रही हैं। उन्होंने बताया कि मुझे बस सिर्फ यही झिझक थी कि मैं डॉक्टर नहीं हूं। उन्हें इस बात पर हैरानी भी हुई कि मरीज उन पर विश्वास करते हैं और उनकी बातों को मानते हैं। यह सब करीब 7 साल पहले की बात है। आज रमादेवी हैदराबाद के पास शाद नगर यूनिट की कॉर्डिनेटर हैं। वह संस्थान की सबसे पुरानी सदस्यों में से एक हैं। उन्होंने कालवाकुर्ती नामक अपने गांव से काम शुरू किया था, पर विजन स्प्रिंग का ऑप्टिकल स्टोर शादनगर में खुलने पर वह वहां शिफ्ट हो गईं। वह अपनी टीम के सदस्यों को ट्रेनिंग भी देती हैं। उनका कहना है, ‘मैं साड़ी के कारोबार में दर्जी का काम करती थी और हिंदुस्तान यूनिलीवर शक्ति की सदस्य भी थी, जब विजन स्प्रिंग के कारोबारी ने मुझे यह मॉडल समझाया। उन्होंने कहा कि पहले मुझे शक था कि मैं चश्मे बेच भी पाऊंगी या नहीं। मैं सिर्फ 12वीं क्लास तक स्कूल गई थी। उसके बाद मेरी शादी हो गई। मेरा कोई मेडिकल बैकग्राउंड भी नहीं है। विजन स्पिं्रग की ट्रेनिंग और ग्रामीणों की मदद करने के जज्बे से प्रेरित होकर मैंने यह ऑफर स्वीकार कर लिया। रमा देवी बताती हैं कि उन्हें 4 दिन की ट्रेनिंग दी गई, जिसमें उन्हें बताया गया कि जिन लोगों की पास की नजर कमजोर है, उन्हें कैसे पहचानना है? विजन स्प्रिंग के एक कारोबारी ने उन्हें रिफ्रेक्शन (अपवर्तन) का सिद्धांत भी समझाया। उन्हें क्लास रूम और फील्ड, दोनों ही तरह से ट्रेनिंग दी गई। रिफ्रेक्शन की ट्रेनिंग से मुझे आंखों की जांच की बारीकियों के बारे में विस्तार से पता चला। विजन स्प्रिंग से जुड़े होने के कारण नज़र के चश्मों की कुल बिक्री पर ही उनकी तनख्वाह निर्भर करती है। वह इसी काम में आगे बढ़ना चाहती हैं। उनका कहना है कि आंध्रप्रदेश के गांव की मूल निवासी होने के नाते वह कमजोर होती नजर की समस्या से जूझ रहे ग्रामीणों की व्यथा से भली-भांति परिचित हैं। उनका कहना है कि विजन स्प्रिंग ने ही उन्हें लोगों की सेवा का मौका दिया है। -पा.पे. चश्मे का कारोबार उनका व्यवसाय है, लेकिन कीर्ति भूषण प्रधान भारत के विशाल मोबाइल नेटवर्क के अत्यंत आभारी हैं। उनका कहना है, ‘‘कई बार मोबाइल के नन्हे-नन्हे बटनों से ही ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोग आश्वस्त होते हैं कि उन्हें चश्मे की जरूरत है।’ स्वास्थ्य देखभाल प्रबंधन विशेषज्ञ के रूप में प्रधान देश में लोगों की आंखों की सेहत के बारे में चौंकाने वाले आंकड़े पेश करते हैं। ‘‘देश में करीब 30 करोड़ लोगों को चश्मे की आवश्यकता है, लेकिन इसमें से केवल 4 करोड़ लोगों की ही नेत्र चिकित्सा और चश्मों तक पहुंच है। बाकी की जनसंख्या को या तो अपनी कमजोर होती नजर के बारे में पता ही नहीं है या वे चश्मा बनवाने का खर्च उठाने में असमर्थ हैं। प्रधान कहते हैं, ‘‘अगर लोग पढ़ने के लिए नज़र का कोई साधारण सा चश्मा भी पहनते हैं तो उससे उनकी उत्पादकता 35 फीसदी तक बढ़ जाती है।’ प्रधान न्यू यॉर्क स्थित विजनस्प्रिंग के भारत में निदेशक हैं और वह जानते हैं कि उनके पास इन आंकड़ों को बेहतर करने में मदद कर सकते हैं। अमेरिकी कंपनी विजनस्प्रिंग भारत और दूसरे विकासशील देशों जैसे ग्वाटेमाला, अल सल्वाडोर, निकारगुआ, बांग्लादेश और दक्षिण अफ्रीका में रहने वाले लोगों की आंखों की सुरक्षा के लिए कम दाम में चश्मे मुहैया कराती है। विजनस्प्रिंग भारत में 2005 से काम कर रही है और इसका मुख्यालय हैदराबाद में है। बिहार, आंध्रप्रदेश, उत्तर प्रदेश और नई दिल्ली में काम करने के लिए यह अपने पार्टनरों की मदद करती है। इसे संस्थाओं, कंपनियों और वैयक्तिक दानदाताओं से मदद मिलती है। दायरा बढ़ाना  विजनस्प्रिंग के प्रारंभिक काम में स्थानीय लोगों को प्रशिक्षण देना शामिल था, जिससे वह नेत्र उद्यमी बनकर अपने-अपने क्षेत्र में आंखों की सुरक्षा के बारे में लोगों को जागरूक कर सकें और इसी क्रम में अच्छी क्वॉलिटी के, लेकिन कम कीमत के नजर के चश्मों की बिक्री कर सके। प्रधान कहते हैं, ‘‘शुरुआत से पहले किए गए विस्तृत प्रारंभिक अध्ययन से यह पता चला कि किसी भी वस्तु को लोगों तक पहुंचाना आसान होता है यदि खरीददारों के बीच से ही उद्यमी उभरें। लक्ष्य के अनुरुप लोगों तक प्रभावी रूप से पहुंचने के लिए कार्यक्रम में तब्दीली लाई गई है।’ विजनस्प्रिंग अब नेत्र शिविर आयोजित करता है, जहां नेत्र विशेषज्ञों और डॉक्टरों की टीम मरीज की आंखों की जांच करती है और मरीजों को जरूरत के हिसाब से चश्मा पहनने की सलाह देती हैं। मरीज अपनी पर्चियों को लेकर जाते हैं और उन्हें कुछ ही देर में चश्मा मिल जाता है। जिन मरीजों की आंखों को और इलाज की जरूरत होती है, उन्हें विजन स्प्रिंग के नेत्र विशेषज्ञ या किसी भागीदार नेत्र अस्पताल जाने को कहा जाता है। कंपनी के प्रतिनिधियों की घर-घर पर विजिट भी चल रही है। कंपनी के रिप्रेजेंटेटिव लोगों के घर जाकर उन्हें आई कैंप के बारे में बताते हैं और नेत्र शिविर की तारीख और समय के बारे में भी उनको याद दिलाते हैं। हर महीने 20 से ज्यादा विजन कैंपेन आयोजित किए जाते हैं। प्रधान कहते हैं, ‘इस अभियान के लिए चयन की प्रक्रिया जटिल नहीं है। काम करने का इच्छुक कोई भी व्यक्ति हमारे साथ काम कर सकता है। इसमें हम यही देखते और सुनिश्चित करते हैं कि वह हमारे साथ कुछ समय के लिए ठहरे।

  • अमेरिका-भारत की टीमों द्वारा विकसित आईब्रेस्टएग्जाम स्तन कैंसर का शुरुआती स्तर पर ही पता लगाता है और यह लोगों की पहुंच में होने के साथ ही कम खर्चीला और बिना दर्द वाला तरीका है।  

  • स्तन कैंसर से पीड़ित महिलाओं की मदद के लिए उत्पाद और सेवाएं उपलब्ध कराने वाले सामजिक उपक्रम कैनफेम ने हाल ही में नेक्सस स्टार्ट-अप हब में प्रशिक्षण लिया है।

  • भारतीय मूल के अमेरिकी डॉक्टरों द्वारा मुंबई में शुरू की गई इमरजेंसी मेडिकल सर्विस का लक्ष्य है लोगों को समय पर तेज़ी से इलाज मुहैया कराना।

  • फुलब्राइट-नेहरू शोधार्थी कायला ह्यूमर का प्रोजेक्ट ऐसे रोगियों को कम खर्चीला इलाज सुझाने पर था जिनके पैरों में डायबिटीज के चलते अल्सर बनने की आशंका रहती है।

  • अमेरिकी सरकार ने हैदराबाद और इंफाल में ऐसे क्लीनिकों के विकास में मदद दी है जहां लांछनमुक्त वातावरण में ट्रांसजेंडर समुदाय को इलाज की सुविधा के साथ मनोवैज्ञानिक सेवाएं भी उपलब्ध हों।

  • विश्व तपेदिक दिवस पर रूज़वेल्ट हाउस में आयोजित कार्यक्रम में अमिताभ बच्चन समेत इस रोग से पीडि़त रहे लोगों ने अपने अनुभव बताए ताकि भारत में इस रोग के खात्मे की गंभीरता को समझा जा सके। 

  • नेक्सस इनक्यूबेटर से प्रशिक्षण पाने वाले बूमएनबज स्टार्ट-अप ने नवीकरणीय ऊर्जा से चलने वाले पोर्टेबल हेल्थ प्लेटफॉर्म को विकसित किया है जिससे जटिल रोगों का पता लगाने में मदद मिलती है।  

  • अमेरिकी फुलब्राइट-नेहरू विद्यार्थी शोधकर्मी लिलियाना बागनोली भारत के ग्रामीण शिशु देखभाल केंद्रों की मदद के लिए तकनीक आधारित आंकड़ों के इस्तेमाल और रिपोर्टिंग को महत्वपूर्ण मानती हैं।

  • ऐसा देखा गया है कि विद्यार्थी की प्राथमिकता सूची में स्वास्थ्य बीमा की जगह बेहद नीचे होती है,  लेकिन इलाज पर भारी खर्च से बचने के लिए अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों के लिए बेहद आवश्यक है स्वास्थ्य बीमा।

  • मिलेनियम एलायंस पुरस्कार विजेता आइंड्रा सिस्टम्स अपनी सर्वअस्त्र जांच-तकनीक में आर्टीफिशयल इंटेलीजेंस का इस्तेमाल गर्भाशय के कैंसर की स्मार्ट, त्वरित और कम खर्च में जांच के लिए कर रहा है।   

  • नेक्सस की सहायता हासिल करने वाली स्टार्ट-अप कंपनी डॉक्टर्नल स्मार्टफोन के जरिये विभिन्न बीमारियों की जांच और पहचान के काम को आसान बना रही है।

  • नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ द्वारा नई खोज के लिए सम्मानित डॉ. वसंत वेदांतम, ऐसे मरीजों के लिए एक नई रीजेनेरेटिव थेरेपी पर काम कर रहे हैं जो हृदय की अनियमित धड़कन की बीमारी का शिकार हैं।  

  • आकाश शाह का स्टार्ट अप केयर/ऑफ मासिक सदस्यता के हिसाब से हर ग्राहक के लिए खास तौर पर तैयार विटामिन पैक उपलब्ध कराता है।